दस्तावेज क्यों देंगे हमारी मर्जी, अधिकारी हैं हम… जांजगीर चांपा कलेक्टर और चांपा सीएमओ की मनमानी… बिना दस्तावेज हो गया भ्रष्टाचार का भूमिपूजन…

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत हनुमान धारा पर्यटन स्थल के विकास कार्य का दस्तावेज जांजगीर चांपा के कलेक्टर कार्यालय से अभी तक नहीं पहुंचा है। वहीं बिना दस्तावेज उसका भूमिपूजन भी हो गया। 3 माह पहले सूचना के अधिकार में दस्तावेज प्रार्थी द्वारा मांगा गया था तब चांपा नपा से लिखित में दिया गया कि दस्तावेज जांजगीर चांपा कलेक्टर के कार्यालय मंगवाया गया है। 3 से 4 माह बीत जाने के बाद भी दस्तावेज भी तक नगर पालिका परिषद चांपा नहीं पहुंचा है। वही नगरपालिका चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों में कमीशन का लालच ऐसा कि बिना दस्तावेज भूमिपूजन भी करवाकर कार्य भी शुरू करवा दिया गया ताकि किसी प्रकार की आपत्ति ना लगाई जा सके। शायद जांजगीर चांपा के कलेक्टर ने प्रार्थी को दस्तावेज देने से नपा चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों को मना कर दिया हो। जिससे प्रार्थी को यह लगने लगा है कि यह अत्यंत ही गोपनीय कार्य है। कही कमीशन संबंधित बातें जो छुपाई जाने योग्य है वो बाहर ना आ जाए। इसलिए आवेदनकर्ता को जांजगीर चांपा जिले के कलेक्टर और सीएमओ चांपा द्वारा दस्तावेज प्रदान नहीं किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी उच्च स्तर के पदाधिकारी समझ रहे जिले के कलेक्टर और सीएमओ…..

प्रार्थी ने कहा कि हनुमान धारा सौंदर्यीकरण के लिए जो कार्य कराए जाने है उसका दस्तावेज आरटीआई के तहत मांगा गया था लेकिन जिस प्रकार प्रार्थी को दस्तावेज प्रदान नहीं किया जा रहा है। उससे साफ स्पष्ट है कि जिले के कलेक्टर, चांपा सीएमओ और ठेकेदारों के बीच काफी तगड़ी सांठ गांठ है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिससे कमीशन संबंधित बातें पुर तरह से सत्य प्रतीत हो रही है। प्रार्थी ने कहा कि अब जिले के कलेक्टर और चांपा सीएमओ अपने आप को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से उच्च पदाधिकारी समझ रहे है। जिसके कारण प्रार्थी को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

बहरहाल हनुमान धारा में भ्रष्टाचार का भूमिपूजन बिना दस्तावेज करा दिया गया है ताकी कोई आपत्ति ना लगाई जा सके और सभी भ्रष्ट ठेकेदार बिना इंजीनियर को निगरानी के विकास कार्य को विनाश कार्य बनाने पूरी तैयारी में लगे हुए है। अब देखना यह है कि अति उच्च पदाधिकारी क्या संज्ञान ले पाते है या विनाश की गाथा पूरी लिखी जाएगी?

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