चांपा नगर में राजस्व अमला क्या खा जाएगा हनुमान धारा का शासकीय भूमि… लगातार हनुमान धारा में भूमाफियाओं का कब्जा जारी… राजस्व अमला ले रहा बंद कमरे में एसी का मजा… 

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वासु सोनी चांपा। नगर के सुप्रसिद्ध हनुमान धारा पर्यटन स्थल में राखड़ कांड नगर के अधिकारियों की बदौलत पूरी तरह से दबा दी गई। वहीं निजी भूमि का रजिस्ट्री अधिकारी से सांठ गांठ कर कई टुकड़ों में बेच दिया गया। जिस पर भी अधिकारी बंद कमरे से मजा लेते रहे। आज तक किसी भी अधिकारी ने हनुमान धारा का दस्तावेज खोल कर नहीं देखा होगा? आखिर हनुमान धारा के शासकीय भूमि का नाप जोख क्यों नहीं किया जा रहा? भू माफियाओं द्वारा खुलेआम शासकीय भूमि पर बाउंड्री वाल बनाकर कब्जा भी किया जा रहा है लेकिन नगर के अधिकारी बंद कमरे का मजा ले रहे है। आवेदनकर्ता द्वारा कई महीनों पहले चांपा एसडीएम पवन कोसमा को आवेदन दिया गया था लेकिन शायद ही उस आवेदन पर किसी अधिकारी की मेहरबानी हुई होगी? शायद भू माफियाओं से सांठ गांठ कर आवेदन गलत लिखा है या आवेदन में सिर्फ कब्जा के बारे में लिखा गया है कहा जाता है? आज तक अधिकारी ने ना ही उस आवेदन को देखा है और ना ही पढ़ा होगा? क्योंकि उस आवेदन की कोई कीमत नहीं है।

हनुमान धारा में बन रहा बाउंड्रीवाल वैध या अवैध कौन करेगा जांच? 

निजी भूमि में राखड़ पाटकर अब किनारे बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि अधिकारी सिर्फ घूमने आते है? उचित तरीके से जांच करने आए तो शायद शासकीय भूमि पर हो रहे कब्जे के बारे में पता चल जाए। वही कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा जा रहा कि अभी तत्काल रूप से जांच की जाए तो पता चलेगा कि बनाया जा रहा बाउंड्रीवाल नाला को पाटकर बनाया जा रहा है। अधिकारी द्वारा इसी कारण दस्तावेज आवेदनकर्ता को नहीं दिया जा रहा है। बाउंड्रीवाल बना रहे मजदूरों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि किसी कैलाश कसेर और नवीन सिंधी नामक लोगों ने बाउंड्रीवाल उठाने कहा है जमीन किसकी है यह हमे मालूम नहीं है? अब इसकी जांच कौन करेगा कि सच्चाई क्या है? आखिर क्या सचमुच नाला को पाटकर बाउंड्रीवाल बनाया जा रहा है? क्या सचमुच राजस्व अमला हनुमान धारा की शासकीय भूमि खा जाएगा? ऐसे अनेक सवालों का जवाब जनता चाह रही है?

क्या हनुमानधारा शासकीय भूमि का दस्तावेज नहीं राजस्व अमले के पास?

नगर की जनता यह भी कह रही है कि हनुमान धारा के शासकीय भूमि का दस्तावेज नगर के राजस्व विभाग में उपलब्ध ही नहीं है? अगर किसी ने दस्तावेज मांगा तो उसे अगले जन्म तक अधिकारी कर्मचारियों द्वारा घुमाया जाएगा? वही दस्तावेज राजस्व अधिकारी कर्मचारी द्वारा दिया ही नहीं जाता। सिर्फ कार्यालयों के चक्कर कटवाया जाता है?

बहरहाल अब देखना यह है कि नगर के अधिकारी इस मामले पर ध्यान देकर जनता को बताएंगे? अधिकारियों से जवाब मिला तो सही नहीं तो जनता खुद ही समझदार है?

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