
वासु सोनी चांपा। भाई बहनों के रिश्ते का पवित्र बंधन राखी पर्व कल देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। जिसकी तैयारियों के लिए बहने सप्ताह भर से लगी हुई है। वहीं मिष्ठान भंडार और दुकान में मिठाईया लेने वालों का तांता लगा हुआ है लेकिन त्यौहार के समय जांजगीर चांपा जिले के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग कहां गायब हो जाता है ये समझ से परे है? क्या त्योहार के समय जांजगीर चांपा में बिकने वाली सभी मिठाइयां मानक और नियमानुसार बनी है या नहीं इसकी भी जानकारी और सुध लेने कोई अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंचते। जिले में और खासकर बड़े जगहों पर बड़ी बड़ी मिष्ठान भंडार और छोटी छोटी दुकानों में कई प्रकार की मिठाई बेची जाती है।
मानक और अमानक जांचेगा कौन?
जांजगीर चांपा जिले और नगर के मिठाई दुकानों में मानक और अमानक मिठाईयां की जांच कब ओर कौन करेगा, इसकी भी जवाबदारी लेने जिला प्रशासन में कोई नजर नहीं आता। हालांकि इसका पूरा फायदा मिष्ठान दुकान संचालकों को मिलता है। मिठाई दुकान संचालक त्यौहार के समय ही मिठाई तत्काल बनाकर बेचते है तो खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग अचानक ही गायब हो जाते है? शायद इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को जनता के जान की कीमत ही नहीं पता?
कर्मचारियों का टोटा?
कुछ दिन पहले किसी पत्रकार के द्वारा विभाग के किसी कर्मचारी से जांच संबंधी बाते पूछी गई तो सहसा ही जवाब मिला कि स्टाफ नहीं है तो कहां कहां जांच करने जाए? जब शिकायत मिलती है तब जांच करने अवश्य जाते है? जिससे यह प्रतीत होता है कि खाद्य सामग्री बेचने वाले और अधिकारी कर्मचारी सांठ गांठ से चलते है? एक तरफ स्टाफ की कमी तो दूसरी ओर शिकायत बिना जांच पर नहीं पहुंचना, सीधा शब्दों में मिठाई दुकान संचालकों से सांठ गांठ की ओर इशारा कर रहे है?
कर्मचारी नहीं है तो क्या कलेक्टर जाएंगे जांच करने?
वर्तमान समय में अधिकतर विभागों में कर्मचारियों की कमी का रोना रोया जा रहा है लेकिन क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग सहित अन्य विभाग जहां कर्मचारियों की कमी है वहां क्या जिले के कलेक्टर खुद जांच करने जाएंगे? अब तो यह सफेद हाथी वाली बात साबित हो रही है।
बहरहाल कल राखी के त्योहार है। मिठाई दुकान में अनेक प्रकार की मिठाइयां सजाकर बेची जा रही है लेकिन मानक और अमानक स्तर जांचने शायद भगवान को ही आना पड़े, क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास अधिकारी और कर्मचारियों की कमी है?


