नगर की दुर्दशा पर अधिकारी कर्मचारी मौन, समय सीमा, जनदर्शन, मीटिंग और वीसी में ही बीत रहा समय, जनता पूछती है तो कहते है साहब मीटिंग में है या फील्ड में है बाद में आना… आखिर जनता के लिए समय कब… 

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वासु सोनी चांपा। लगातार वेब मीडिया में चांपा नगर की दुर्दशा के बारे के समाचार फोटो सहित प्रकाशित करने और उच्च अधिकारियों तक भेजने के बाद भी कार्रवाई ना हो पाना और कार्रवाई की जानकारी ना देना, अधिकारी और कर्मचारी वर्ग की निम्न स्तरीय मानसिकता को प्रदर्शित कर रही है? वही प्रतिदिन किसी ना किसी विषय पर मीटिंग, वीसी आयोजित किया जा रहा है। जिसके लिए अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ यही कहते नजर आते है कि मीटिंग चल रहा है, वीसी में हूं, आखिर जनता की समस्या का समाधान कब होगा? सोमवार से शुक्रवार तक मीटिंग और वीसी, वहीं शनिवार और रविवार छुट्टी रहे, तो फिर इससे अच्छी नौकरी देश, विदेश तो क्या पूरी सृष्टि में ढूंढने से नहीं मिलेगी। मजा तो तब आता है जब अधिकारी और कर्मचारी जानकारी मिलने के बाद बड़े आराम से या फिर कार्रवाई करते ही नहीं तब तक मामला खत्म हो जाता है।

आपको बता दें कि शनिवार और रविवार छुट्टी तो होती ही है साथ ही सोमवार जिला स्तरीय मीटिंग, फिर जनदर्शन, फिर वीवीआईपी मीटिंग, फिर उच्च अधिकारियों की मीटिंग, फिर विश्वस्तरीय मीटिंग जैसे तमाम मीटिंग के बाद अगर समय बच जाए तो जनता का काम होता है, उस पर भी अधिकारी फील्ड में गए है आयेंगे तो होगा, कर्मचारी कहते है हम क्या कर सकते है अधिकारी है हम थोड़ी ना बोलेंगे, ऐसे तमाम हथकंडे अपनाने के बाद जनता को महीने दो महीने में जवाब जरूर मिल जाता है।

शिकायत दो, हमारे पास समय नहीं, विभाग का कोई कानून नहीं जांच पर जाने का…

जिले और नगर के विभागों में विभाग स्तरीय जांच करने जाने का कोई कानून बना ही नहीं है, जब तक शिकायत ना हो कोई कार्रवाई होती ही नहीं है? वही शिकायत देने के बाद साहब नहीं है, मीटिंग में गए है, दिखवा लेता हु और फिर मामला टाय टाय फिस्स वाली बात हो जाती है। जिले में लगभग 50 से भी अधिक विभाग है लेकिन इनकी विश्वस्तरीय जांच कराया जाए तो पता चले कि काम कैसे चल रहा है।

नगर के अधिकारियों की आंख के सामने मौत का सामान, कार्रवाई नहीं शिकायतकर्ता कि चुगली…

कई बार तो यह बात भी सामने आ जाती है कि किसी जनहित के कार्य पर अधिकारी शिकायतकर्ता की चुगली करने से नहीं चुकते कहते फिरते है कि फलाना का आपसे नहीं जमता क्या? जिसके कारण शिकायत हुई है? नगर और जिले के अधिकारी जिम्मेदारी से बचते हुए दूसरे के कंधों पर बंदूक रख हमला करने से नहीं चुकते वाली कहावत को चरितार्थ करते नजर आते है। वैसे भी साहब अधिकारी है कौन क्या बोल सकता है?

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