चांपा लायंस चौक में मौत का लाइटिंग बोर्ड गेट आखिर किस अधिकारी के आदेश से लगा… टेंट संचालकों को किसने दिया आदेश…. कभी भी हो सकती है मौत… स्कूटी सवार युवती टकराकर गिरी, बाल बाल बची…

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वासु सोनी चांपा। एक ओर नगर में गणेश उत्सव का माहौल भव्य बनने जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर गणेश उत्सव के नाम पर लोगों की मौत से खिलवाड़ करने कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

आपको बता दें कि गणेश उत्सव समितियों द्वारा गणेश उत्सव को भव्य बनाने हर संभव तरीका अपनाया गया है। वहीं डेकोरेशन को लेकर टेंट और लाइटिंग भी लगवाया गया है। वहीं लायंस चौक के पास विराजित गणेश पंडाल रोड पर ही लगा दिया गया है। चलिए कोई बात नहीं आस्था के नाम पर कर सकते है लेकिन पंडाल और टेंट संचालकों को जिले के किस अधिकारी ने आदेश दे दिया कि रोड पर मौत रूपी लाइट लगा दें और तो और रोड के आधे से अधिक जगह पर बांस बांध कर और लोहे का एंगल लगा हुआ लाइट बोर्ड भी लगा दिया है। जिससे आज कल में कभी भी जनता में से किसी की मौत हो सकती है।

क्या जिले के कलेक्टर ने दी अनुमति?

नगर में गणेश उत्सव में पंडाल लगाने और बेतरतीब ढंग से लगाने के लिये क्या जिले के कलेक्टर ने अनुमति दी होगी? चांपा नगर के अंदर अधिकारी और कर्मचारियों की बात करें तो उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है? संभवतः जिले के कलेक्टर या संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों ने ऐसा मौत का गेट लगाने अनुमति दी होगी? जिसकी जानकारी ना ही पंडाल और ना ही चांपा नगर के अधिकारी कर्मचारी देना चाह रहे है?

बाल बाल बची स्कूटी सवार युवती…

रात तकरीबन 10 बजे लायंस चौक के पास लगे सजावटी लाइटिंग गेट से टकराकर युवती स्कूटी सहित गिर गई, हालांकि युवती को किसी प्रकार की चोट नहीं आई लेकिन रात में लोहे के एंगल का नहीं दिखना किसी ना किसी की जान जरूर ले सकता है। वही इसकी जानकारी एसडीओपी चांपा को देने पर उन्होंने नगर पालिक की जवाबदेही बताई साथ ही यह भी कहा नपा कर्मचारियों से बात करने पर उन्होंने हर वर्ष समिति द्वारा ऐसा ही गेट लगाते है बताया है कहा, वही दूसरी ओर नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी रिश्वत रूपी गंगा में डुबकी लगाकर गणेश भक्ति की साधना में लगे हुए है। जिससे उनकी आंखों पर अंधेरा छा गया है?

यात्री बस ने भी बदला रास्ता…

टेंट संचालकों द्वारा किसकी अनुमति से यह गेट लगाया गया है इसकी जानकारी किसी को नहीं है, वही बड़े बस भी अपना रास्ता बदलकर जाने मजबूर दिखे। कुछ दिनों के लिए सजाया गया यह पंडाल रोड को अनधिकृत रूप से जनहित को परेशान करने के उद्देश्य से लगाया हुआ प्रतीत होता है। आखिर जिले और नगर के किस अधिकारी की सरपरस्ती से यह कार्य संभव हो सका है।

बहरहाल नगर में गणेश उत्सव की धूम बढ़ती जा रही है। वही अव्यवस्था देखने के नाम पर नगर के अधिकारी कर्मचारियों की मौज ही मौज है? आस्था सिर्फ पत्रकारों द्वारा खबरों का प्रकाशन करने पर बताई जाती है लेकिन अव्यवस्था के नाम पर जो परोसा जाता है वह आस्था का सर्वोच्च उदाहरण माना जा सकता है? अब देखना यह है कार्रवाई होगी या आस्था के नाम पर सारी बातों को दबा दिया जाएगा?

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