
वासु सोनी चांपा। त्योहारी सीजन आते ही मिष्ठान दुकान संचालकों की चांदी हो जाती है। लगातार त्योहार और पर्व के होने से मिष्ठान दुकान में कई प्रकार की मिठाई का विक्रय किय जाता है। वही मिठाई की मानक तय करने और जांच करने जिले के अधिकारी शायद ही पहुंच पाते है। जिले के खाद्य और औषधि प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी को हर बार यही कहते सुना जाता है कि कर्मचारियों की कमी के कारण पूरे जिले में मिठाई दुकान में जांच कर पाना संभव नहीं है। जहां शिकायत मिलती है वही जांच के लिए जाते है।
आपको बता दें कि जिले में खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग में अधिकारी और कर्मचारियों की कमी के चलते जिले और नगर के लोगों को अमानक खाद्य सामग्री के साथ गुजारा करना पड़ रहा है। वही जिले और नगर में लगातार खाद्य सामग्री की दुकानें खुलती जा रही है। त्योहारी सीजन होने के कारण मिष्ठान दुकान संचालकों द्वारा अमानक मिठाई भी बेची जा रही है। जिसकी जांच के लिए जिले के खाद्य और औषधि प्रशासन कभी नहीं पहुंचते। जिसका पूरा फायदा मिष्ठान दुकान संचालकों को मिल रहा है। चांपा नगर की बात करें तो मिष्ठान दुकान संचालक त्यौहार सीजन के लाखों की कमाई करते है, सम्भवतः उस कमाई का कुछ अंश खाद्य और औषधि प्रशासन की ओर जरूर पहुंचता होगा? जिसके चलते नगर में वर्ष में एक दो बार जांच हो जाए तो बहुत बड़ी बात है।
कर्मचारी की कमी से जूझ रहा जिला जांजगीर चांपा…
जिले में लगातार खाद्य सामग्री की व्यावसायिक प्रतिष्ठान लगातार खुलते जा रही है। जिसकी जांच की जवाबदारी जिले के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों की है लेकिन विभाग में कर्मचारियों की कमी का पूरा फायदा वर्तमान में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को मिल रहा है। उनका कहना होता है कि शिकायत होगी तब ही जांच के लिए जा पाएंगे, नियमित जांच के लिए विभाग में कर्मचारी नहीं है।
बहरहाल त्योहारी सीजन और पर्व लगातार चलने वाला है बावजूद जिला प्रशासन सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठे है, वही मीटिंगों में सिर्फ निर्देश ही दिए जा रहे है। लगातार समाचारों की सुर्खियां बनने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन को खुली छूट दी जा रही है, जिसका खामियाजा नगर और जिले की जनता को भुगतना पड़ सकता है? अब देखना यह है कि कार्रवाई होगी या सिर्फ निर्देश दिया जाएगा?


