
वासु सोनी चांपा। स्टेशन रोड मेहंदी पारा के एक युवक को बीते दिन 09 सितंबर को दोपहर तकरीबन 1 बजे के आसपास अवैध शराब बेचने की कार्रवाई करते हुए चांपा थाने लाया गया था। उसके साथ कुछ और आरोपियों को लाया गया था, जहां दो आरोपियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल दाखिल कर दिया गया, वही शिव सहिस (गुल्लू) की कार्रवाई पूरी नहीं होने पर उसे थाने में ही रखा गया। 09 सितंबर की रात लगभग 11 बजे के लगभग गुल्लू की तबियत खराब होने पर उसे बीडीएम अस्पताल ले जाया गया। जहां रात भर पुलिस निगरानी में रखने के बाद उसकी तबियत और खराब होने पर शिव सहिस उर्फ गुल्लू की सुबह जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शिव सहिस के मरने के बाद दी परिजनों मिली सूचना…
09 सितंबर को अवैध शराब के लिए लाए गए आरोपी शिव सहिस की जिला चिकित्सालय में मृत हो जाने की सूचना सुबह तकरीबन 8 बजे उसके परिजनों को दी गई। जिससे आक्रोशित परिजनों सहित मेहंदी पारा के लोगो ने थाने पहुंच उग्र प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। वहीं थाना प्रभारी अशोक वैष्णव जब थाने पहुंचे तब उग्र लोगो से थाना प्रभारी ने बात कर मामले को सम्हालने की कोशिश की लेकिन उग्र लोगो की भीड़ ने कुछ सुनना मुनासिब नहीं समझा बल्कि अश्लिल शब्दों से खरी खोटी सुनाने लगे। साथ ही चांपा थाने के आरक्षक ईश्वरी राठौर सहित संलिप्त कर्मचारियों की निलंबन की मांग और एफआईआर दर्ज करने की मांग रखी गई।

बढ़ती भीड़ को सम्हालने बुलाना पड़ा बल…
शिव सहिस की मौत से उग्र परिजन और मोहल्लेवासियों ने थाना परिसर और बाहर प्रदर्शन जारी रखा, जिसे देखते हुए अन्य थानों के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सहित बल बुलाने पड़े। भीड़ और मोहल्लेवासियों ने अपनी मांगों को लेकर घण्टो प्रदर्शन किया। परिजन और मोहल्लेवासी की मांग यह थी कि रात में शिव सहिस को घर से उठाने वाले ईश्वरी राठौर सहित अन्य पुलिस कर्मचारियों को निलंबित करते हुए उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करते रहे। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति और उग्र प्रदर्शन के बीच अन्य स्थानों के पुलिस अधिकारी और बल बुलाने पड़े।

एसडीएम, तहसीलदार की भी नहीं माने परिजन…
चांपा थाने में परिजन और मोहल्लेवासियों की उग्र भीड़ के बीच प्रशासनिक अधिकारी जब पहुंचे तब उन्होंने भी परिजन और भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने तब प्रशासनिक अधिकारी भी किनारा देखने लगे।

ईश्वरी राठौर को किया गया तत्काल निलम्बित
मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा चांपा थाने के आरक्षक ईश्वरी राठौर को निलंबित कर दिया गया। जिसकी जानकारी मिलने पर उग्र प्रदर्शनकारी कुछ शान्त नजर आए।

लेना पड़ा न्यायिक प्रक्रिया का सहारा…
ना समझने वाली भीड़ को समझाने की बहुतायत प्रयास के बाद जब परिजन और भीड़ किसी की कुछ नहीं सुन रहे थे तब व्यवस्था सम्हालने न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ा। जिसके लिए भीड़ के बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को मजिस्ट्रेट जांच के लिए आना पड़ा। जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाने का निरीक्षण किया और परिजनों को मृतक के पास जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के सुपुर्द किया गया।
मुक्तिधाम और मेहंदी पारा में लगाई गई सुरक्षा बल…
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की सुरक्षा के लिए मंझली तालाब मुक्तिधाम और मेहंदी पारा में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। वही जब जिला चिकित्सालय से शव को मुक्तिधाम लाने के बजाय मेहंदी पारा ले जाया तब भी पुलिस की चौकसी नजर आई। कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो किसी विशेष व्यक्ति की सुरक्षा की जा रही हो।
मुआवजे और पालन पोषण की बात को लेकर नहीं हो पाया क्रियाकर्म संस्कार…
पोस्टमार्टम के बाद जिला चिकित्सालय से मृतक के शव को मुक्तिधाम ले जाने के बजाय मेहंदी पारा ले जाया गया, जहां मुआवजे, पालन पोषण और रात हो जाने की बात को लेकर परिजन और मोहल्लेवासियों ने शव का क्रियाकर्म करने से मना कर दिया। जिसके कारण रात भर पुलिस के अधिकारी, सुरक्षा बल के जवान मेहंदी पारा के समीप चौकसी करते नजर आए।

50 रुपए के स्टाम्प में लिखा पढ़ी होने के बाद सुबह हुआ अंतिम संस्कार…
स्टाम्प पेपर पर लिखे इकरारनामे के अनुसार, थाना प्रभारी चांपा के पद पर पदस्थ रहने वाले संबंधित थाना प्रभारी द्वारा मृतक शिव सहीस के परिवार के बच्चों की शिक्षा, पोषण एवं पारिवारिक लालन-पालन के लिए प्रतिमाह 25 हजार रुपये आर्थिक सहायता जीवन भर देने, साथ ही माता-पिता के बाद बच्चों को भी यह सहायता दिए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मृतक के अंतिम संस्कार में हुए लगभग ढाई लाख रुपये के खर्च के लिए आर्थिक सहायता दिए जाने की बात भी दस्तावेज में दर्ज है। वहीं इस लिखित इकरार के आधार पर मृतक शिव सहीस के परिवार को भविष्य में मिलने वाली आर्थिक सहायता और उसके क्रियान्वयन पर सबकी नजर रहेगी।
हटाए गए निरीक्षक अशोक वैष्णव… और किस पर गिरेगी गाज…
चाम्पा नगर के इस पूरे घटनाक्रम और मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षक अशोक वैष्णव को लाइन अटैच कर दिया गया। किसी थाने में इस पर की घटना और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की लापरवाही के चलते प्रभारियों की साख को भी खतरा रहता है हालांकि निरीक्षक अशोक वैष्णव को हटाकर निरीक्षक केके शेण्डे को चांपा थाना का प्रभारी बनाया गया है? वही अब यह देखना है कि घटना के पटाक्षेप के बाद और किस पर कार्रवाई की गाज गिरेगी।
नहीं पहुंचे कलेक्टर और एसपी?
इतने संवेदनशील घटना को देखते हुए कई स्थानों के पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी चांपा थाने में लगाने वाले जिले के पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय और प्रशासन के उच्च अधिकारी कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने एक बार भी मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा? वही कुछ विभागीय लोगों के द्वारा यह भी कहते सुना गया कि जब सभी पुलिस अधिकारी यही है तो उच्च अधिकारी को आने की जरूरत नहीं है। तो दूसरी ओर जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयं ही मौके पर पहुंचे और जांच निरीक्षण किया।
बहरहाल पूरे घटनाक्रम में यह देखने वाली बात है आखिर वो क्या वजह थी, जिसके कारण चांपा नगर में ऐसी घटना घटी? सवाल तो कई है लेकिन जवाब कब मिलेगा, इसका इंतजार सभी को है? फिलहाल देखने वाली बात यह है कि इसकी जांच से पर्दा कब उठेगा? क्या सचमुच पुलिस ने मारपीट की? आखिर आरोपियों से कौन पुलिस कर्मचारी रुपए लेता है? डॉक्टरी जांच में क्या आएगा? मजिस्ट्रेट जांच कब पूरी होगी? दोषी को क्या सजा मिलेगी? ऐसे तमाम सवालों के साथ शायद यह घटना भी इतिहास के पन्नो में शामिल होने के लिए तैयार है।


