
वासु सोनी चांपा। नगर की बेतरतीब यातायात व्यवस्था को बहाल करने स्वयं भगवान को अवतरित होना पड़ेगा। सालों से व्यापारी वर्ग नगर के मुख्य मार्ग पर कब्जा जमा कर बैठे हुए है। साथ ही आधे से अधिक रोड पर दुकान खोल व्यवसाय भी कर रहे है। नगरपालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी, यातायात विभाग के अधिकारी कर्मचारी और जिला प्रशासन सालों से मूक दर्शक बन कर बैठे है। राहगीरों का मानना है कि जब तक अधिकारी कर्मचारी की जेब गर्म होती रहेगी तब तक रोड पर से दुकान हटवाना किसी के बस को बात नहीं?
आपको बता दें कि नगर में प्रवेश करने वाले मुख्य मार्ग स्टेशन रोड पीडब्लूडी कार्यालय के सामने दुकान संचालक आधे से अधिक रोड पर कब्जा कर दुकान संचालित कर रहे है। जिसकी जानकारी जिला प्रशासन, पुलिस और नगर प्रशासन को है बावजूद कार्रवाई करने अधिकारी कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं? वही दूसरी ओर बैरियर चौक पर भी यही स्थिति रोजाना देखने को मिलती है, जिले के उच्च वर्ग के अधिकारी कर्मचारी और नगर पुलिस, यातायात पुलिस सभी की आँखों के सामने व्यापारी अपना दुकान रोड पर संचालित कर रहे है। जिसे बंद कराने की जहमत किसी भी विभाग का अधिकारी कर्मचारी नहीं उठा पा रहे है।
रिश्वत की मलाई या दबाव का डर?
वर्षों से आधे से अधिक रोड पर दुकान का संचालन कर रहे व्यापारी और दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं कर पाना, रिश्वत की मलाई या डर का दबाव है? इसकी जांच करने और कार्रवाई करने शायद ही कोई अधिकारी कर्मचारी सामने आयी? अब तो यही प्रतीत हो रहा है कि शायद भगवान के अवतरण लेने के बाद ही कार्रवाई हो पाएगी?
यातायात अधिकारी को जानकारी, कार्रवाई कुछ नहीं…
यातायात अधिकारी को आधे से अधिक रोड पर जानकारी देने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर पाना, सोच का विषय है? क्या यातायात विभाग के साथ उच्च स्तरीय सांठ गांठ है या कुछ और मामला है। यातायात अधिकारी फोटो उपलब्ध होने के बाद भी कार्रवाई ना हो पाना, मलाई खाने की ओर इशारा है?
बहरहाल नगर में आधे से अधिक रोड पर कब्जा कर व्यवसाय करना आम बात हो गई है, जिससे सहज ही महसूस हो रहा है कि कोई भी नगर में किसी भी स्थान पर पूर्ण रूप से कब्जा कर अपना व्यवसाय कर सकत है। इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस या नगर प्रशासन के अधिकारी कर्मचारियों की कोई जरूरत नहीं है।


