
वासु सोनी चांपा। जिले की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले के प्रमुख अधिकारी के रूप में कलेक्टर नियुक्त किए जाते है, लेकिन जिले की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है या नहीं इसकी जानकारी लेने कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किए जाते। जांजगीर चांपा जिले की बात करें तो अब जिले कलेक्टर को ही खेत, सड़क, बाजार सभी जगह पहुंच कर स्वयं ही देखना और निराकरण करना पड़ रहा है, जबकि जिले के कलेक्टर के अधीन जिले के सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी कर्मचारी आते है।
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा जिल की दशा और दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। जिले में लगभग 35 से 40 विभाग है जिनसे आम जनता की समस्याओं का निराकरण किया जाता है। सभी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी भी नियुक्त है, लेकिन जिले की समस्या और निराकरण का जायजा लेने कलेक्टर खुद पहुंच रहे है, इससे बड़ी मजबूरी और क्या होगी? जिले के कलेक्टर समयानुसार सोमवार और मंगलवार को समय सीमा की बैठक भी लेते है, लेकिन समय सीमा में कलेक्टर द्वारा सिर्फ दिशा निर्देश देकर छोड़ दिया जाता है और समय सीमा बैठक खतम होने के बाद कलेक्टर को ही स्थिति देखने जाना पड़ रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी?
क्या विभागों के अधिकारी कलेक्टर की नहीं सुन रहे?
सहसा ही जिले के नागरिक और आमजन को यह कहते सुना जा सकता है कि फलाना विभाग का काम नहीं हो रहा है, अधिकारी नहीं है, बाद में आना? वहीं जिले के कलेक्टर प्रति सोमवार या मंगलवार विभागीय समयानुसार समय सीमा की बैठक लेते है, लेकिन समझ यह नहीं आता कि समय सीमा की बैठक में विभागों के अधिकारी कलेक्टर की सुनते भी है या नहीं? क्या विभागों के अधिकारी कर्मचारी बैठक के बाद अपनी मनमर्जी चलाते है? समय सीमा की बैठक के बाद भी कार्य पूरा क्यों नहीं हो पा रहा? प्रत्येक विभागों की ऐसी क्या मजबूरी की शासन का ही कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा? कलेक्टर क्या सिर्फ़ दिशा निर्देश ही देते रह जाएंगे? कागजी दस्तावेजों को जांच मौके पर क्यों नहीं की जा रही? ऐसी तमाम बातें है जो आमजन की समझ से बाहर है लेकिन कोई उन्हें समझाने वाला नहीं। हालांकि समय सीमा की बैठक होती रहेगी? अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया जाएगा, लेकिन कार्य सिर्फ खयालों में ही पूरे होेंगे धरातल कुछ और कहेगा?
बहरहाल जिले के कलेक्टर और उनके मातहत अधिकारी और कर्मचारियों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है? बस देखना यह रह जाता है कि इसका जवाब नौकरशाह दे पाएंगे या ठंडा बस्ता तो है ही?


