चांपा थाने के आरक्षकों की शिकायत मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल 1076 में, शिकायतकर्ता विकास शर्मा और पीड़ित को न्याय का इंतजार… क्या पहले भी हो चुकी है शिकायत… 

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वासु सोनी चांपा। पुलिस थाना चांपा के दो आरक्षकों की शिकायत मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल 1076 पर की गई है। साथ ही वीडियो भी जारी किया गया है। मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल 1076 में शिकायत की जानकारी उच्च अधिकारियों को होने के बाद कार्रवाई का इंतजार है, बहरहाल जांच किस प्रकार की होगी इस पर शिकायतकर्ता और लोगों की निगाह टिकी है।

आपको बता दें कि शिकायतकर्ता विकास शर्मा के द्वारा पुलिस कर्मियों/अधिकारियों का व्यवहार ठीक न होना/पुलिस द्वारा मारपीट करना एवं अनावश्यक रूप से परेशान किया जाना/मोबाईल चोरी अथवा अवैध कस्टडी/अभिरक्षा में रखने संबंधी कस्टोडियल वायलेंस (मारपीट), सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सुरक्षित रखने एवं भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जाँच बाबत शिकायत की गई है।

शिकायत में लिखा गया है कि पीड़ित अविश दास महंत पिता रतन दास महंत, निवासी-संजय नगर, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा के आवेदन एवं प्राप्त जानकारियों के अनुसार पुलिस द्वारा अवैध कस्टडी व मारपीट 1 सितंबर 2026 की रात लगभग 11:30 बजे पुलिसकर्मियों (ईश्वरी राठौर एवं साथी) द्वारा पीड़ित को जबरन थाने ले जाकर बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई, जिससे उसके दोनों हाथों पर गंभीर चोटें आई हैं। थाने में अवैध गतिविधि व भ्रष्टाचार जानकारी के अनुसार, उसी रात पुलिस द्वारा जुआ खेलने वाले कई व्यक्तियों को पकड़कर थाने लाया गया था। आरोप है कि लेनदेन (रिश्वत) करके कुछ लोगों को छोड़ दिया गया और कुछ पर दुर्भावनापूर्वक केस दर्ज किया गया। वही शिकायतकर्ता द्वारा सीसीटीवी (CCTV) साक्ष्य सुरक्षा – सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत घटना वाली रात (1 सितंबर 2026) के थाना चांपा परिसर एवं बैरक के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को तत्काल ज़ब्त कर सुरक्षित रखा जावे, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके। निष्पक्ष जाँच व कार्रवाई मारपीट करने वाले दोषियों (ईश्वरी राठौर व साथी) के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई तथा जुआ प्रकरण में हुए अवैध लेनदेन की स्वतंत्र एजेंसी से जाँच कराने संबंधित बातें लिखी है।

अब देखना यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत क्या रंग लाती है। पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाएगा? उच्च अधिकारियों द्वारा किस प्रकार कार्रवाई की जाएगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब, शिकायतकर्ता की मांगें और पीड़ित को न्याय का इंतजार है?

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