
वासु सोनी चांपा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणेश उत्सव की धूम नगर में तो रहेगी ही लेकिन आस्था के नाम पर कुछ भी कर देने की प्रथा कभी खत्म नहीं होगी।
गणेश उत्सव की धूम चारों तरफ होने वाली है जिसके लिए नगर की समितियां तैयारी करने लगी हुई है। इसी बीच परशुराम चौक मेला मैदान में साज सज्जा के लिये लगे पेड़ों की छंटाई की गई है। जिसकी जानकारी शायद ही जिले या नगर के जिम्मेदार को पता हो, लेकिन आस्था के नाम पर इस प्रकार पेड़ो को काटना, कहा तक सही है? ऐसे कई सवाल है जिनका जवाब शायद ही किसी जिम्मेदार के पास उपलब्ध हो। वही परशुराम चौक मेला मैदान में बिना किसी अनुमति के पेड़ो की छंटाई की गई है।
आस्था के नाम पर नियमों की उड़ रही धज्जियां…
कुछ दिनों में आस्था का सैलाब नगर में दिखने वाला है जिसके लिए नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। नगर के हर गली मोहल्ले में लाइट, पंडाल की चकाचौंध देखने को मिलेगी, लेकिन नियमों की बात करें तो कोई भी विभाग आस्था के साथ खिलवाड़ करने नहीं आएगा बल्कि आस्था दिखाने वाले खुद खिलवाड़ करते नजर आयेंगे, जिसकी लाइन में खुद जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी भी लगे होंगे?
कितनी समितियाँ या कितने लोग लेते है आस्था के नाम पर अनुमति…
नगर में आस्था के नाम पर समितियां और निजी लोग आयोजन तो करते है लेकिन विभागीय अनुमति कौन कौन लेता है इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती बल्कि बिना अनुमति के आयोजन निपटा दिए जाते है। आखिर आस्था के नाम पर लोगों को प्रेरित करने वाले नियमों को ताक पर रखकर अनुमति लेना भी मुनासिब नहीं समझते?
बहरहाल गणेश समितियां द्वारा अनुमति और बिना अनुमति के सारी तैयारियां कर ली गई है, जिसकी जानकारी जिले और नगर के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी शायद ही ले पाए? अब देखना यह है कि आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे समितियां और निजी लोगों पर कार्रवाई करेंगे या उनके द्वारा तैयार आस्था की गुफा में बैठ अधिकारी कर्मचारी साधना करेंगे?


