वासु सोनी कोरबा। बिलासपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) राकेश रंजन ने शनिवार को कोरबा रेलवे क्षेत्र का दौरा किया। एआरएम कार्यालय में कर्मचारियों और एसईसीएल अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने रेलवे अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान महिला कर्मचारियों ने कमरों की दीवारों में सीपेज और बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की शिकायत की। समस्या पर अधिकारियों के संतोषजनक जवाब नहीं देने पर डीआरएम ने नाराजगी जताते हुए इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई।
डीआरएम ने साथ मौजूद चांपा एडीईएन और आईओडब्ल्यू से अस्पताल की छत से पानी टपकने की समस्या के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारियों ने छत पर पत्ते जमा होने को इसका कारण बताते हुए सफाई कराने की बात कही। इस जवाब से असंतुष्ट डीआरएम ने सवाल किया। डीआरएम ने स्वयं छत पर जाकर स्थिति देखने की बात कही। इस पर अधिकारियों ने सीढ़ी उपलब्ध नहीं होने की बात कही। इसे लेकर डीआरएम ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और समस्या के स्थायी समाधान पर जोर दिया।शाम 6:13 बजे डीआरएम राकेश रंजन और एडीआरएम के. श्रीनिवास शिवनाथ एक्सप्रेस से बिलासपुर के लिए रवाना हो गए। दौरे के दौरान पिटलाइन को लेकर पूछे गए सवाल पर डीआरएम ने स्पष्ट किया कि कोरबा की पिटलाइन अधूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि पिटलाइन का काम पूरा हो चुका है और वहां सेकेंडरी मेंटेनेंस किया जा रहा है। डीआरएम के मुताबिक, प्रायमरी मेंटेनेंस के लिए आवश्यक संसाधन और पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध नहीं होने के कारण ट्रेनों का पीएम (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) वहां नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिटलाइन के अधूरे होने की बात सही नहीं है, बल्कि प्रायमरी मेंटेनेंस के लिए आवश्यक संसाधनों और कर्मचारियों की कमी मुख्य वजह है।
कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं
डीआरएम राकेश रंजन और एडीआरएम के. श्रीनिवास सुबह करीब पौने 12 बजे सडक़ मार्ग से कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद एआरएम कार्यालय में दोपहर करीब डेढ़ बजे तक कर्मचारियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए। इसके बाद सेकेंड एंट्री पर स्थित कोल साइडिंग से जुड़ी समस्याओं को लेकर एसईसीएल अधिकारियों के साथ बैठक हुई। डीआरएम ने रेल संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की और उनकी बात सुनी।

