वासु सोनी चांपा। जांजगीर चांपा जिले सहित चांपा नगर की बात करे तो स्ट्रीट फूड की जिले में बाढ़ सी आ गई है लेकिन खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी अजीत बघेल, मोहित बेहरा सहित अन्य कर्मचारी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रहे है। जांजगीर चांपा नगर में ठेला संचालकों की मनमानी और खाद्य की गुणवत्ता जांचने के नाम पर खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग शायद रिश्वत या कमीशन लेकर जांच नहीं कर पा रहा है? वही जिले के कलेक्टर भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन पर अच्छे खासे मेहरबान नजर आ रहे है? क्योंकि कई वर्षों से खाद्य पदार्थों की उचित जांच विभाग नहीं कर पा रहा है वहीं कलेक्टर के निर्देशन में चलने वाले विभाग के काम नहीं कर पाने से कार्रवाई नहीं कर पाना संदेह को जन्म दे रहा है या यह भी कह सकते है कि यह सच्चाई की ओर इशारा कर रहा है?
फोन उठाना नहीं चाहते खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी कर्मचारी
सम्भवतः जिले के कलेक्टर के निर्देशन में चल रहे विभागों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को फोन नहीं उठाने का आदेश जारी किया गया होगा? जिसके चलते खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी किसी का फोन उठाना पसंद नहीं करते। उन्हें शायद तक केंद्रीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त नजर आता है? नगर की जनता और उनकी जान के साथ खिलवाड़ करने वाला खाद्य एवं औषधि प्रशासन सिर्फ अपनी जेब गर्म करने पर ज्यादा ध्यान देना पसंद कर रहे है? साल में एक या दो बार जांच कर विभागीय पल्ला झाड़ लिया जाता है, जिसकी जानकारी कलेक्टर को होने के बाद भी विभाग अपनी मर्जी करने आमादा नजर आता है।
सिर्फ शिकायत पर कार्रवाई करने काम कर रहे अधिकारी कर्मचारी, विभागीय जवाबदारी कुछ नहीं…
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की जांच और कार्रवाई के लिए बनाया गया है लेकिन जिला जांजगीर चांपा में उसके उल्टे काम चल रहा है। सिर्फ शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है अन्य दिनों में जांच करने के लिए विभागीय नियमों में कुछ नहीं लिखा हुआ है? जिसके चलते लोगों की जान की कीमत से उन्हें कोई सरोकार नहीं है, उन्हें सिर्फ उनकी सैलरी और कभी कभार कार्रवाई करने आने पर जेब गर्म होने का ही पता होता है?
बहरहाल जांजगीर चांपा जिले का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग क्या काम कर रहा है उसकी जानकारी शायद जिले के कलेक्टर को भी ना हो, लेकिन बिना जांच, गुणवत्ताहीन बिक रहे खाद्य पदार्थों की जांच नहीं कराना किसी बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे है बावजूद ना ही जिले के कलेक्टर और ना ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन को कोई सरोकार है, अब देखना यह है कि कार्रवाई होगा या और अधिक जेब गर्म?
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