
जांजगीर चांपा। भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHT), चांपा में आज व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हथकरघा क्षेत्र के विकास, पारंपरिक बुनकर कौशल के उन्नयन तथा प्रशिक्षार्थियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्यक्रम एकीकृत संस्थान विकास कार्यक्रम (IIDP) के अंतर्गत संस्थान के पुनरुद्धार एवं हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से परियोजना की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती रीचा सिंह, IIHT की गवर्निंग बॉडी सदस्य श्रीमती मनीषा पाटले, जिला रेशम अधिकारी मधुप चंदन जांजगीर-चांपा, सहायक संचालक हथकरघा सौरभ सिंह ठाकुर, NCHHD के टीम लीड पी. रंगारी, उमेन साहू एवं सुनील कुमार शर्मा सहित गवर्निंग बॉडी के अन्य सदस्यगण के साथ साथ शिव देवांगन, नरोत्तम देवांगन, मेघराज देवांगन, माधीलाल देवांगन, अक्षिता कैवर्त, जयंत छत्रिय एवं बिहारीलाल पटेल तथा संस्थान के समस्त अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने व्यावसायिक प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्रशिक्षार्थियों के तकनीकी कौशल में वृद्धि होगी तथा उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। हथकरघा क्षेत्र में पारंपरिक कला एवं आधुनिक तकनीक के समन्वय से स्थानीय बुनकरों और कारीगरों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
IIDP परियोजना के अंतर्गत IIHT चांपा को पुनर्जीवित करने तथा हथकरघा क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास एवं संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार करने और हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थियों को पूरी लगन, अनुशासन एवं उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक दक्षता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा चांपा क्षेत्र की समृद्ध हथकरघा परंपरा को आगे बढाना है।


