
वासु सोनी चांपा। कुछ दिन पहले रामबांधा तालाब की साफ सफाई के लिए कलेक्टर ने एक वैज्ञानिक को तरीका पूछने बुलाया था। जिस पर उनके रूकने, खाने-पीने के लिए खर्चा भी किया गया था, लेकिन आज तक ना ही साफ सफाई शुरू की गई और ना ही कुछ निष्कर्ष निकाला गया। वहीं नगर पालिका के सीएमओ रामसंजीवन सोनवानी से जब इस बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि जिले के कलेक्टर ने सिर्फ जानकारी के लिए बुलाया गया था लेकिन उस जानकारी पर बहुत ज्यादा बजट बनने के कारण उसे कैंसिल कर दिया गया। अब उस तालाब मतलब नगर का सबसे बड़ा रामबांधा तालाब अपने विकास की बाट जोह रहा है। मामला तो तब शुरू होता है जब निविदा में तालाब में मछली पालन संबंधित काम शुरू होता है। निविदा भी दे दिया जाता है और मछली पालन भी हो जाता है लेकिन तालाब की साफ सफाई तालाब जिसके नाम पर है वो करेगा या फिर नगर की जनता करेगी। मैं तो करूंगा नहीं क्योंकि मैं पत्रकार हूं। अब लोग पत्रकारों से कहते फिर रहे कि साहब से बोलकर तालाब साफ करवा दीजिए। अब आप या आम जनता या उच्च अधिकारी बताएं कि पढ़े लिखे उच्च ओहदे के अधिकारी तालाब साफ नहीं करवा पा रहे तो तालाब साफ कौन करेगा?
नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा का खेल लगातार जारी है जो बंद कमरे में चल रहा है तो वहीं नगर पालिका के अधिकारी सिर्फ दिखावे का काम कर रहे है। जिले के उच्च अधिकारी भी ईमानदारी का मुखौटा लगाए फिर रहे हैं। रामबांधा तालाब नगर का एकमात्र बड़ा तालाब है जो अपने विकास को लेकर तरस रहा है तो दूसरी ओर अधिकारी सिर्फ अपने उच्च अधिकारी से बात करने कहते फिरते है। फिलहाल होना कुछ नहीं है क्योंकि विकास के नाम पर निविदा ही जारी किया जा रहा है।
अब देखना यह है कि नगर के रामबांधा तालाब की सफाई नगर विकास की बात करने वाले अधिकारी कर पाते हैं या फिर नगर की जनता को बार बार पत्रकारों को अधिकारी से बात करने बोलना पड़ेगा या फिर जनता को ही पूरा तालाब साफ करना पड़ेगा। अब तो जनता केन्द्रीय राजनीति की ओर रूख करने का मन बना रही है। संभवतः नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है इस कारण ये कुछ भी काम करने का मन नहीं बना पा रहे हैं।

