वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत हनुमान धारा में करोड़ों की लागत से सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाना है जो लगभग शुरू हो चुका है या होने वाला है। लेकिन सौंदर्यीकरण से जुड़े संबंधित दस्तावेज को आरटीआई के माध्यम से मांगने पर कई महीने बीत जाने के बाद भी नहीं देना, गंभीर लापरवाही दर्शाता है। वहीं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय में शिकायत आवेदन देने के बाद भी आरटीआई से मांगे गए दस्तावेज नहीं देना, शासकीय सेवकों को उनके उच्च स्तरीय पद पर बैठे रहने का अभिमान ठेकेदारों से सांठगांठ दर्शाता है। साथ ही साथ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय के सेवकों से भी सांठगांठ दर्शा रहा है।
आपको बता दें कि कुछ माह पूर्व चांपा नगर के हनुमान धारा पर्यटन स्थल पर जिले के उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा सौंदर्यीकरण कराये जाने हेतु प्रस्ताव दिया गया था। जिस पर सभी की सहमति भी बनी और नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा निविदा जारी किया गया। निविदा की सारी प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य आदेश भी दे दिया गया। इसी बीच पत्रकार द्वारा हनुमान धारा सौंदर्यीकरण दस्तावेज हेतु आरटीआई लगाया गया। जिसका जवाब संबंधित आरटीआई अधिकारी द्वारा यह दिया गया कि समस्त दस्तावेज कलेक्टर कार्यालय भेजा गया है, आने पर दिया जाएगा। इस बीच लगभग दो से तीन माह बीत जाने के बाद भी दस्तावेज कलेक्टर कार्यालय से नहीं आया। जिसका समाचार भी प्रकाशित किय गया। जिसे देखकर चांपा नपा सीएमओ और चांपा एसडीएम द्वारा अपने कार्यालय बुलाकर समाचार ऐसा नहीं लिखा जाता कहते हुए सौंदर्यीकरण संबंधित दस्तावेज देने चर्चाए की गई। बावजूद एक माह बीत जाने के बाद भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। जिससे साफ प्रतीत हो रहा है कि जिले और नगर के सभी अधिकारी कमीशन के चक्कर में ठेकेदारा से सांठगांठ कर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कर रहे हैं। साथ ही नगर पालिका के कर्मचारी सिर्फ खानापूर्ति के लिए फोन लगाकर कहते हैं कि दस्तावेज बहुत ज्यादा है आकर जो दस्तावेज चाहिए ले जाएं लेकिन उन शब्दों को कागज में लिखकर देने के लिए आनाकानी करते नजर आते है।
अब देखना यह है कि आरटीआई में मांगे गए दस्तावेज पत्रकार उपलब्ध कराया जाता है या फिर संबंधित ठेकेदार और उच्च स्तरीय अधिकारियों की सांठगांठ से दस्तावेज नहीं दिया जाएगा।
कर्मचारियों द्वारा जानकारी देने आनाकानी?
आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारियों की कार्यशैली संदेहास्पद है। आए दिन नगर की जनता को परेशान करना ही उनका कार्य बन गया है। किसी भी दस्तावेज के लिए बार बार नपा चांपा बुलाना और उस कार्य को पूरा नहीं करना ही उनका कार्य बन गया है। उन्हें वेतन सिर्फ आम जनता को परेशान करने का दिया जा रहा है। आप ही सोचिए की प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होना अफसरशाही की दादागिरी को दर्शा रहा है।

