आखिर हो ही गया हनुमान धारा में भ्रष्टाचार का भूमिपूजन? जनता सिर्फ आरटीआई लगाते रह जाएंगे, क्या कमीशन खाकर अधिकारी निकल जाएंगे?

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में भ्रष्टाचार की किताबों के पन्ने लगातार बढ़ते जा रहे है। वही अधिकारियों की संलिप्तता की जांच करने उच्च अधिकारी भी हाथ खड़े कर रहे है। संभवतः नगर विकास के काम में कमीशन का दायरा लगभग 50 प्रतिशत से भी ऊपर का पहुंच चुका होगा। नया और ताजा उदाहरण यह है कि हनुमान धारा पर्यटन स्थल के लिए विकास की बयार लिखने लगभग 3 करोड़ का निविदा जैसे तैसे हो गया। लेकिन सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज देने नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी की मंशा नहीं है, कहीं दस्तावेज देने से कमीशन संबंधित मामले उजागर ना हो जाए। नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों की माने तो जनता कर भी क्या सकती है। उन्हें सिर्फ कागजों के खेल में उलझाए रखना ही उनका उद्देश्य है। वहीं उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा अपने कार्यालय बुलाकर भी समझाइश देते नजर आते है लेकिन गलती होने के बावजूद दस्तावेज देने की बात कहकर दस्तावेज दिया ही नहीं जाता। शायद जिले के कलेक्टर का मार्गदर्शन ही ऐसा मिला होगा कि जनता कुछ दस्तावेज मांगे तो उन्हें प्रताड़ित करने के बाद ही दस्तावेज देवे या फिर आज कल करते हुए सिर्फ घुमाते ही रहे।

बिना दस्तावेज दिए करा दिया गया भूमिपूजन?

हनुमान धारा में विकास कार्य के लिए इतनी तत्परता से भूमिपूजन किया गया है कि सूचना के अधिकार में दस्तावेज देने पर कोई आपत्ति ना लगा जाए सोचकर ही नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा आवेदनकर्ता को सूचना के अधिकार के तहत जवाब ही नहीं दिया गया। संभवतः कमीशन का खेल इतना बड़ा होगा कि ठेकेदार के साथ मिलकर दस्तावेज नहीं देने का मन बना लिया गया है। अधिकारी कर्मचारियों और ठेकेदार की आपसी सांठ गांठ इतनी उच्च स्तर की है कि जनता सिर्फ अधिकारियों का मुंह ताकते रह जाती है। एक ओर अधिकारी और कर्मचारियों को वेतन भी मिल जा रहा तो दूसरी ओर संभावित लाखों का कमीशन भी? जिसके कारण जल्दबाजी में विकास कार्यों का भूमिपूजन भी कराया जा रहा है। अपने चहेते ठेकेदार को फायदा दिलाने नपा चांपा के अधिकारी कर्मचारी एडी चोटी जोर लगा रहे है।

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