कमीशन, भ्रष्टाचार और ठेकेदार… समय मिल जाए तो जनता की भी सुन लो प्रशासनिक सरकार… क्यों नहीं कर पा रहे जांच, क्या सिर्फ वेतन के लिए कर रहे कार्य…क्या कहता है प्रशासनिक नियम….
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद अंतर्गत अधिकारियों की भ्रष्ट कार्यशैली का नायाब उदाहरण नगर के गौरव पथ को देखा जा सकता है। जहां अधिकारियों की जेब गर्म होने के बाद अब सिर्फ एक ही गुणगान गाया जाता है कि सब सही है, सब दस्तावेज है लेकिन सूचना के अधिकार में दस्तावेज देने और आवेदन देने या समाचार प्रकाशित करने के बाद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई ना कर पाना, भ्रष्टाचार के खुला उदाहरण है।
आपको बता दें कि कुछ वर्ष पहले गौरव पथ रोड का निर्माण किया गया, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने साथ ही अपनी जेब गर्म करने के कारण रोड के बीच बनाए गए डिवाइडर में व्यावसायिक लाभ पहुंचने हेतु खाली जगह छोड़ दिया गया। वही जिले के प्रभारी मंत्री, कलेक्टर, अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारियों की भ्रष्ट मंशा के चलते यह रोड मौत का रोड बन गया है। आए दिन गौरव पथ में दुर्घटनाएं हो रही है समाचार भी प्रकाशित हो रहे है लेकिन जिले के कलेक्टर और उनके अधीनस्थ संबंधित अधिकारी कर्मचारी अपनी कुंभकर्णीय नींद के मजे ले रहे है। जांच तो दूर अधिकारी किसी बात का जवाब देना और आवेदन लेना भी अपनी गरिमा के अनुरूप समझ रहे है।
कोई फर्क नहीं पड़ता…
जी हां आम जनता सिर्फ अधिकारियों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते है। चांपा नगर की बात करें तो आवेदन दो और भूल जाओ कि तर्ज पर कई आवेदन कार्यालयों की धूल खा रहे है। उच्च स्तरीय जांच की बात करें तो स्थानीय अधिकारियों की दादागिरी की चलते उच्च स्तरीय जांच भी दबा दी जाती है। नगर की कई ऐसे मामले है जिनके आवेदन का जवाब देना अधिकारी अपनी तौहीन समझते है। नगर के अधिकारियों की माने तो उनके पास सिर्फ ठेकेदारों के दस्तावेज का जवाब देने का समय है या फिर यह भी कह सकते है कि जिले के कलेक्टर का आदेश आए तो पहले वही कार्य पूरे करने होते है जो आदेशित हो।
बहरहाल नगर की जनता और उनके आवेदन सिर्फ अधिकारियों के टेबल की शोभा बढ़ा रहे है। अब देखना यह है कि इन समाचारों से कुछ जनता हित के कार्य होते है या ठेकेदारों के दस्तावेज ही देखे जाते रहेंगे।

