वासु सोनी चांपा। नगर में होने वाले विकास कार्यों की जांच बंद कमरे में कई की जाती है? ऐसे अनेक सवाल है जो नगर की जनता चाहती है लेकिन उसका जवाब सिर्फ यही मिल पाता है कि हमारे द्वारा जांच किया जाता है, सब सही है? लेकिन जनता की माने तो जनता के सामने स्वतंत्र रूप से अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदारों के कार्यों की जांच क्यों नहीं करते? क्या ठेकेदारों के दस्तावेज और विकास कार्यों की जांच गोपनीयता के दायरे में आती है?
आपको बता दें कि नगर विकास से संबंधित सारे कार्य स्वतंत्र रूप से और खुले रूप में जनता के सामने किए जाने चाहिए, लेकिन ऐसे मामलों में अधिकारी और कर्मचारी सारे नियमों की किताबें लेकर जनता के सामने बैठ जाते है। जिससे जनता को सिर्फ यही बताया जाता है कि ये सारे कार्य बंद कमरे और गोपनीयता के दायरे में आते है, इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। अब यह सोचने वाली बात है कि नगर विकास के कार्य प्रशासनिक नियमों के अनुसार बंद कमरे और गोपनीयता के दायरे में आते है, तो यह माना जा सकता है कि भ्रष्टाचार और लेन देन की इबारत कैसे लिखी जाएगी?
जांच के दस्तावेज क्यों नहीं किए जाते सार्वजनिक?
नगर विकास में हो रहे कार्यों की जांच के लिए अधिकारी नियुक्त होते है जिन्हें विकास कार्य की जांच करनी होती है लेकिन वे अधिकारी कार्य समाप्त होने के बाद आखिर क्या जांचने पहुंचते है, यह सोच का विषय है? वहीं जनता के सामने जांच के दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? क्या विकास कार्य के दस्तावेज इतने गोपनीय होते है कि उन्हें बनाने में जनता के टैक्स से मिलने वाले रुपयों का उपयोग किया जाता है जिसके कारण जनता को कही भ्रष्टाचार का पता ना चल जाए। संभवतः इसी कारण नए नियम बनाकर गोपनीयता का दर्जा दे दिया जाता है?
बहरहाल विकास कार्य को लेकर अधिकारी कर्मचारी जांच में कब, कैसे पहुंचते है उसकी जानकारी सार्वजनिक करने और जांच के उपरांत दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करने में उन्हें क्या फायदा मिलता होगा ये सोचने वाली बात है। फिलहाल चांपा नगर में कई निर्माण कार्य शुरू होने वाले है अब देखना यह है कि जांच सही और सार्वजनिक किए जाएंगे या ठेकेदार के मनमर्जी से सारे कार्य किए जाएंगे?

