
वासु सोनी चांपा। बीते कुछ माह पहले हनुमान धारा में राखड़ पाटकर निजी जमीन को टुकड़ों में बेचा गया। स्वयं नामांतरण की स्थिति होने के कारण सभी का नामांतरण भी ऑटोमैटिक हो गया। लेकिन इतनी तगड़ी सांठ गांठ बिचौलियों और नपा चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों के बीच रही होगी कि नगर क्षेत्र के अंदर राखड़ पाटे जाने की जानकारी के बाद भी किसी अधिकारी और कर्मचारी ने कुछ कहने या जांच करने की जहमत नहीं उठाई। सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि एनओसी स्लैग च्यूरी का दिया जा रहा है लेकिन रातों रात लाखों टन राखड नगर सीमा के भीतर पाट दिया गया। जिसकी जांच करना नगर पालिका परिषद चांपा के किसी भी जिम्मेदार ने नहीं समझा। बल्कि अधिकारी और कर्मचारी पत्रकारों को यही समझाते रहते है कि राखड़ की अनुमति हमने नहीं दी। वही उनसे मिलने की सलाह दी जाती है जिन्होने राखड़ की अनुमति दी, परन्तु एनओसी के बाद जांच क्यों नहीं की गई इसकी जानकारी सीएमओ चांपा से लेने कहा जाता है। लेकिन वहां भी यही जवाब मिलता है कि मुझे नहीं पता मै नया आया हु, लेकिन जांच अधिकारी तो पुराना होगा? आज वर्षों बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार की जांच नहीं की गई। आखिर कितने रुपयों में यह मामला सेट हुआ होगा इसकी जानकारी भी जल्द ही जुटा ली जाएगी?
बहरहाल सवाल यह है कि एनओसी चांपा नपा के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा दी गई तो फिर जांच क्या जिले के कलेक्टर करने आयेंगे? जानकारी होने के बाद भी जांच शुरू क्यों नहीं की गई? राखड़ पाटने के बाद होने वाली घटना में मौत का जिम्मेदार कौन होगा? कितने की सांठगांठ, कहां कहां की गई? प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय शिकायत का पत्र किस अधिकारी ने गायब कर दिया? ऐसे अनेक सवालों के जवाब नगर की जनता मांग रही है तो वहीं जिले के अधिकारी अपनी वेतन लेकर आराम की जिंदगी गुजार रहे है। अब देखना यह है कि मामले में जांच शुरू होगी या बिचौलियों से दोबारा सांठ गांठ किया जाएगा?

