
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में नया नया मामला देखने और सुनने को मिल रहा है। वर्तमान जिला कलेक्टर की टीम में शायद कुछ खास है जो ऐसा मामला लगातार देखने को मिल रहा है। उस पर भी जनता का रुपया बर्बाद करने और अपनी जेब करने अधिकारी कोई गुरेज नहीं कर रहे है। वहीं अधिकारी अपने कोप भवन में विराजमान होकर बात करना तो दूर सुनना भी मुनासिब नहीं समझ रहे है। सार्वजनिक की जाने वाली सभी चीजों को गोपनीय बनाकर अपनी कुदृष्टि का नजारा जनता को दिखा रहे है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निविदा निरस्त मामला?
नगर पालिक परिषद चांपा में जिला के अधिकारियों की कोई लगाम नहीं लगी है। जिसके चलते नया मामला सुनने को मिल रहा है। जनवरी माह से अपने चहेते ठेकेदारों को निविदा देने का मामला गरमाया हुआ है। जो अब रौद्र रूप लेने लगा है। जिन ठेकेदारों से नपा चांपा में अधिकारी और कर्मचारियों के चेहरे खिल जाते है वहीं अब निविदा मामले के चलते हाईकोर्ट के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है।
मुआवजा की राशि कौन देगा शासन या सीएमओ पद पे बैठा व्यक्ति?
निविदा निरस्त मामले में ठेकेदार को क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख का मुआवजा देने के आदेश दिया गया है। जिसका भुगतान कौन करेगा इसकी चर्चा से नगर का माहौल गर्म है। कहीं नगर पालिक के कर्ता धर्ता अब शासन के रुपयों का बंदरबाट कर मुआवजा की राशि देने की साजिश रचते नजर आ रहे है, तो दूसरी ओर ठेकेदार पूरी राशि के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुके हैं। अब देखना यह है कि क्षतिपूर्ति की राशि जो मुआवजा के रूप में ठेकेदार को मिलना है उसका भुगतान शासन करेगी या सीएमओ पद में बैठा व्यक्ति भुगतान करेगा।
बहरहाल नगर पालिका परिषद चांपा में अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते नगर की जनता के जेब में डाका डालने की उम्मीद जताई जा रही है। अब शासकीय सेवक अपनी जेब से ऐसे मामले में भुगतान करने लगे तो फिर शासकीय सेवा देने का फायदा ही क्या?

