वासु सोनी चांपा। एक गाना तो सभी ने सुन होगा! ये दुनिया एक नंबरी तो मै दस नंबरी…कुछ इसी तर्ज पर नगर पालिक परिषद चांपा में इन दिनों कमीशन का खेल लगातार जारी है। अब देख लो निविदा भी निकालना है, कमीशन भी चाहिए और ठेकेदार भी चहेते होने चाहिए। मामला अब गड़बड़ा गया…चलो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ये क्या ठेकेदार तो नाराज हो गया…हाईकोर्ट से मुआवजा आदेश आते ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया…निविदा नहीं दिया तो क्या हुआ, कमीशन तो पूरा ही लूंगा? जनता को समझ नहीं आ रहा मुआवजा के रूपया देगा कौन? जिले के मुखिया भी गर्मी में एसी का आनंद उठा रहे होंगे? तो नपा अधिकारी भी सोचे हम भी आनंद उठाएंगे… लेकिन जनता भरी गर्मी में अपनी जेब की ओर देख रही है… कही फिर डाका ना डलवा दें अधिकारी कर्मचारी… लाखों मुआवजा जो देना है? फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ता…किसे? आप तो खुद समझदार ही है! फिर भी बता देता हूं अधिकारी और कर्मचारियों को? क्योंकि उन्हें तो वेतन समय पर मिल रहा है बाकी कोई फर्क नहीं पड़ता….

