हमे भी शासकीय भूमि पर कब्जा करने दीजिए साहब… नगर के अधिकारियों का हो जा रहा तबादला, हनुमान धारा शासकीय भूमि कब्जा मामले कार्रवाई जीरो…

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वासु सोनी चांपा। नगर के हनुमान धारा स्थित शासकीय भूमि कब्जा के मामले में नगर के कोई भी अधिकारी कर्मचारी जानकारी देने कतराते नजर आ रहे है? भूमाफिया द्वारा नगर के अधिकारी और कर्मचारियों को कितने राशि का मुनाफा दिया गया होगा?
आपको बता दें कि नगर के हनुमान धारा स्थित शासकीय भूमि का मूल्य करोड़ों में पहुंच चुका है, जिसे बड़ी आसानी से कब्जा कर भूमाफिया बेच रहे है या बेचने की फिराक में है? लेकिन समझ यह नहीं आ रहा कि जिले में राजस्व के उच्च अधिकारियों के होते हुए भी शासकीय भूमि बड़ी आसानी से कब्जा कर बेची जा रही है। हनुमान धारा पर्यटन स्थल स्थित करोड़ों की शासकीय भूमि के बारे में लगातार समाचार प्रकाशन के बाद भी अधिकारी कर्मचारी सिर्फ मजा ले रहे है।
इसकी टोपी उसके सर…
हनुमान धारा में शासकीय भूमि कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल 1076 में भी की गई है लेकिन जांजगीर चांपा जिले के अधिकारी भ्रष्टाचार में इतने लिप्त हो चुके है कि वे इसका जवाब तक नहीं दे पा रहे है। वही पूर्व में हुए जांच की कॉपी डालकर प्रार्थी को भ्रमित किया जा रहा है। जबकि प्रार्थी के द्वारा वर्तमान में हनुमान धारा की शासकीय भूमि की जांच के लिए आवेदन लगाया गया था। उसके बाद भी नगर और जिले के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ इसकी टोपी उसके सर में बिठाने लगे हुए है।
भूमाफिया से कितने में हुई होगी सांठ गांठ?
नगर की आम जनता सिर्फ यही सोच और पूछ रही है कि करोड़ो की शासकीय भूमि पर कब्जा करने वाले पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो नगर को जनता भी हनुमान धारा की शासकीय भूमि पर कब्जा कर सकती है क्या? लेकिन इसका भी जवाब जिले और नगर के अधिकारी और कर्मचारी नहीं दे पा रहे है, शायद भूमाफिया और अधिकारी कर्मचारी की सांठ गांठ ऐसी है कि पूरी शासकीय भूमि भूमाफिया को दी जा चुकी होगी? इसलिए इसका जवाब देने अधिकारी कर्मचारी कतराते नजर आ रहे है।
बहरहाल चांपा नगर के हनुमान धारा पर्यटन स्थल के आसपास शासकीय भूमि पर भूमाफिया द्वारा कब्जा कर लिया गया है, लेकिन अधिकारी कर्मचारी सिर्फ नजारा देखने पहुंच रहे है, वहीं नगर की स्थित के बारे में बताना भी मुनासिब नहीं समझ रहे। अधिकारी और कर्मचारियों का मानना है कि जनता सिर्फ आवेदन दे, हमारे द्वारा जवाब देना जरूरी नहीं है। अब देखना यह है अपनी मर्जी से काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी शासकीय भूमि बचा पाते है या नहीं?

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