
वासु सोनी जांजगीर चांपा। पुरानी सिंचाई कॉलोनी परिसर में स्थित शासकीय श्री सिंह वाहिनी माँ दुर्गा मंदिर एवं शिव मंदिर तथा उद्यान पर बाहरी व्यक्तियों द्वारा अनाधिकृत रूप से कब्जा करने एवं नियंत्रण स्थापित करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने कलेक्टर जांजगीर-चांपा तथा कार्यपालन अभियंता, हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग जांजगीर चांपा के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और उसकी आधिकारिक पावती प्राप्त कर ली है।
विकास शर्मा ने बताया कि पुरानी सिंचाई कॉलोनी का मंदिर परिसर पूर्णतः जल संसाधन (सिंचाई) विभाग की शासकीय भूमि व प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। उक्त मंदिर में विगत 30 से 40 वर्षों से बसंत कुमार शर्मा पुजारी के रूप में अनवरत पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्य निष्ठापूर्वक संपन्न कराते आ रहे हैं।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि कार्यपालन अभियंता, हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग जांजगीर चांपा द्वारा पूर्व में ही स्पष्ट आधिकारिक सूचना जारी कर यह आदेशित किया गया था कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पूर्णतः विभाग के अधीन रहेगी और इसकी व्यवस्था समिति में केवल सिंचाई विभाग के कार्यरत शासकीय सेवक ही सदस्य हो सकते हैं।
इसके बावजूद कुछ बाहरी गैर-विभागीय व्यक्तियों राहुल सिंह सिसोदिया, आशुतोष पाण्डेय, बजरंग कुमार शर्मा इत्यादि द्वारा श्री सिंह वाहिनी एवं शिव कल्याण सेवा समिति (पंजीयन क्र. 122202675706) नाम से एक अवैध निजी समिति का गठन कर लिया गया है। उक्त समिति के पदाधिकारियों का सिंचाई विभाग से कोई संबंध नहीं है। इनके द्वारा शासकीय बाउंड्री वॉल एवं मंदिर की दीवारों पर अनाधिकृत चेतावनी बोर्ड व दान संबंधी निर्देश पेंट करवा दिए गए हैं तथा श्रद्धालुओं को भ्रमित किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, पिछले चार दशकों से निस्वार्थ सेवा दे रहे पुजारी बसंत कुमार शर्मा को अनुचित चेतावनी पत्र जारी कर दबाव बनाया जा रहा है और मंदिर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। शासकीय भूमि पर निजी समिति बनाकर कब्जा जमाना पूरी तरह से अवैध और शासकीय नियमों के विरुद्ध है।
आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा ने प्रशासन एवं सिंचाई विभाग से मांग की है कि शासकीय मंदिर परिसर से बाहरी समिति के अनधिकृत हस्तक्षेप को तत्काल रोका जाए, दीवारों पर लिखे गए अवैध निर्देशों को हटवाया जाए, तथा नियम विरुद्ध शासकीय संपत्ति पर पंजीयन कराने वाली फर्जी समिति के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जावे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में व्यवस्था में बदलाव होता है तो मंदिर का संपूर्ण संचालन व नए पुजारी की नियुक्ति का अधिकार केवल सिंचाई विभाग के पास ही रहना चाहिए।


