वासु सोनी चांपा। एक ओर जांजगीर चांपा जिले में खनिज चोरी लगातार हो रही है। तो वहीं दूसरी ओर कभी कभार कार्रवाई कर अधिकारी कर्मचारी अपना पल्ला झाड़ ले रहे है।
आपको बता दें कि खनिज अधिकारी और कर्मचारियों का पास बात करने के लिए भी समय नहीं है। शायद उन्हें कलेक्टर कार्यालय में रहने का भरपूर संरक्षण मिल रहा है। जिले में चाहे पानी गिरे या ना गिरे लेकिन अवैध रेत का परिवहन जोरों शोरो से चल रहा है। वहीं खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारी इतने ज्यादा व्यस्त है कि जिले में चल रहे मिट्टी मुरूम खनन की भी जानकारी नहीं है? वहीं जिले में रेत माफियाओं के आगे खनिज अधिकारी भी नतमस्तक है? जबकि जिले में सबसे ज्यादा रेत चोरी का खेल चल रहा है लेकिन खनिज अधिकारी और कर्मचारियों के पास उतना समय नहीं की वे इसकी जांच करने जा सके। साथ ही अगर किसी ने ऐसे मामलों की जानकारी लेनी चाही तो अधिकारी बाद में बात करने की बात कहत हुए पल्ला झाड़ लेते है। शायद रेत माफियाओं के द्वारा इतनी ज्यादा बार फोन कर दिया जा रहा होगा कि अधिकारी अन्य सामाजिक लोगों और पत्रकारों से बात करने समय ही नहीं निकाल पा रहे है। शायद खनिज अधिकारी खनिज राजस्व वसूली में कुछ ज्यादा ही व्यस्त है प्रतीत होता है?
बहरहाल आम जनता के पास खड़े होने से यही सुनने को मिलता है कि जब जांच ही नहीं करना है तो खनिज विभाग खोलने का क्या फायदा है? जितनी जांच होती है उससे कहीं ज्यादा रेत चोरी का खेल चल रहा है? बावजूद खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए है? अब देखना यह है कि सिर्फ शिकायत पर काम करने वाले अधिकारी विभागीय नियम से काम कर पाते है या शिकायत का ही इंतजार करते रहेंगे?

