जीआरपी और आरपीएफ के सामने 2 स्टालों में चोरी, चांपा स्टेशन में रात्रि गश्त की खुली पोल… अब उच्च अधिकारी कार्रवाई करेंगे या ढूंढेंगे बहाना… रात के समय चांपा स्टेशन भगवान भरोसे?

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वासु सोनी चांपा। नगर में रेलवे द्वारा नित नए आयाम गढ़ने की बाते सोशल मीडिया में प्रचारित की जा रही है तो वहीं उसकी वास्तविकता कुछ और ही बयान करती है? बीती रात और अल सुबह चांपा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2-3 के दोनों छोर पर स्थित 3 स्टॉलों का कांच, प्लाई और ताला तोड़कर अज्ञात युवक के द्वारा रुपए और सामानों की चोरी कर ली गई है। वही चांपा स्टेशन की जीआरपी और आरपीएफ इसकी जांच में जुटी हुई है।

आपको बता दें कि बीती रात तकरीबन साढ़े 12 बजे के आसपास चांपा स्टेशन स्थित जीआरपी चौकी और आरपीएफ पोस्ट के सामने स्थित 1 स्टॉल, कुछ दूर दूसरी स्टॉल और प्लेटफॉर्म के अंत में तीसरी स्टॉल में लगातार चोरी की गई। जिसकी जानकारी रात्रि गश्त में तैनात जीआरपी और आरपीएफ कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। वही चोर ने बड़ी आसानी से तीनों दुकानों से रुपए चोरी कर चला भी गया। जहां सोचने वाली बात यह है कि आखिर चांपा स्टेशन में जीआरपी और आरपीएफ के रात्रि गश्त में होने का ढिंढोरा पीटने वाले अब इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे? क्या जीआरपी और आरपीएफ ड्यूटी के दौरान स्टेशन परिसर में मौजूद नहीं थे? ड्यूटी के दौरान स्टाफ क्या कर रहे थे? ऐसे तमाम सवालों के जवाब स्टाॅल संचालकों और आम जनता ढूंढ रही है?

सीसीटीवी में रिकॉर्ड चोरी की वारदात…

चांपा स्टेशन में बीती रात और सुबह हुई चोरी की घटना बिलासपुर छोर पर लगी सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई है। सीसीटीवी में रिकॉर्ड युवक को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि वह पकड़ा गया युवक नशे का आदी और आदतन अपराधी है। जिसके द्वारा पूर्व में भी कई बार चोरी की गई थी। फिलहाल चोरी की घटना में जीआरपी और आरपीएफ जांच में जुटी हुई है।

जीआरपी और आरपीएफ की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह…

एक ओर रेल प्रशासन सुरक्षा की बात कहते नजर आता है वहीं लगातार चोरी की वारदात के बाद अब देखना यह है कि जीआरपी और आरपीएफ पर उनके उच्च अधिकारी कार्रवाई कर पाएंगे या उन्हें अभयदान दिया जाएगा? आखिर जीआरपी और आरपीएफ ड्यूटी के दौरान क्या करते है जिसके चलते एक साथ तीन दुकानों में चोरी हुई है? वही स्टॉल संचालकों ने बताया कि रात के समय चांपा स्टेशन भगवान भरोसे चलता है? कौन कब किस समय ड्यूटी करते है इसकी जानकारी रेल प्रशासन को भी नहीं रहती। कागजो में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों पर रेल प्रशासन इतना मेहरबान क्यों रहता है?

 

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