वासु सोनी चांपा। दीपावली के पहले भालेराव मैदान में लग रहे पटाखे की स्टॉल में अवैध काली कमाई का जरिया खुल कर सामने आ रहा है। दीपावली के पहले 50 से भी अधिक दुकान बना दिया गया है। जिसके लिए नगर के पत्रकारों की नजरें सिर्फ पटाखा दुकान की नियमों पर टिकी हुई है। वही जांच और नियम के नाम पर सिर्फ खोखला दिखावा किया जा रहा है। सम्बन्धित अधिकारियों के द्वारा किसी भी प्रकार के नियमों को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। एसडीएम चांपा शशि चौधरी से 20 दिन पहले हुई बात के बाद भी पटाखा दुकानों को अधिकारियों द्वारा खुला संरक्षण दिया जा रहा है। वही जिले के उच्च अधिकारियों द्वारा सिर्फ मजा लेने की बात सामने आ रही है।
क्यों नहीं की जा रही कार्रवाई? करोड़ो के पटाखे नगर में घूम रहे, अधिकारी कर्मचारी मस्ती में झूम रहे?
दीपावली पर्व में करोड़ो के पटाखे नगर में आने की संभावना व्यक्त की जा चुकी है, अधिकारियों को इसकी जानकारी भी मिल चुकी है बावजूद नगर और जिले के अधिकारी कर्मचारी पटाखों की जांच आज तक नहीं कर पाए है, वहीं नगर के एसडीएम शशि चौधरी ने बताया कि चांपा पटाखा संघ के पदाधिकारियों को बुलाकर समझाइश दी गई है लेकिन यह समझ नहीं आया कि पटाखों की जांच और समझाइश के बीच की सांठ गांठ क्या है? जब बात जांच करने की हो रही है तो समझाइश क्यों दी जा रही है?
बिना नियमों के भालेराव मैदान में कैसे खड़े हो गए टेंट?
दीपावली के पहले भालेराव मैदान में पटाखा विक्रेताओं के लिए टेंट की व्यवस्था की जाती है लेकिन बिना नियम के कैसे भालेराव मैदान में टेंट खड़ा कर दिया गया। वही नगर पालिका परिषद चांपा को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है? क्या नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी इतने बिकाऊ हो चुके है कि उन्हें यह भी पता नहीं कि सार्वजनिक मैदान के टेंट किसने और कैसे लगा दिया? नगर के अधिकारी कर्मचारी के पास इतना भी समय नहीं की वे इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सके?
बहरहाल वर्तमान समय तक किसी भी प्रकार से कार्रवाई कर पाना अधिकारी और कर्मचारियों के बस की बात नहीं लग रही। सम्भवतः अवैध पटाखे, अवैध नियम, अवैध कमाई की जीत हो सकती है?



