वासु सोनी जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)। जांजगीर-चांपा जिले के अंतर्गत ग्राम बिरगहनी और देवरहा में संचालित चूना पत्थर (लाइम स्टोन) खदानों में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग और अवैध उत्खनन से पूरा क्षेत्र खौफ के साए में जी रहा है। नियमों के उल्लंघन और जन सुरक्षा को खतरे में डालने की इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) धनबाद और क्षेत्रीय कार्यालय रायगढ़ को एक आधिकारिक शिकायत भेजकर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिबंध के बावजूद जारी है हैवी ब्लास्टिंग
शिकायतकर्ता विकास शर्मा ने बताया कि पूर्व में ग्रामीणों की शिकायत पर खान सुरक्षा उपनिदेशक निवास चिर्रा खान की टीम ने क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण किया था। जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद विभाग ने बिरगहनी की 6 खदानों और देवरहा की 2 खदानों में बोर ब्लास्टिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, रसूखदार खदान संचालकों द्वारा विभागीय आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए आबादी क्षेत्र से महज 300 मीटर की दूरी पर 24 घंटे हैवी ब्लास्टिंग की जा रही है।
खतरे में ग्रामीणों की जान और पर्यावरण
खदानों में वैज्ञानिक पद्धति (बेंचिंग) के बिना की जा रही लंबवत कटाई के कारण कभी भी बड़े भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। गहरे माइनिंग पिट्स के चारों ओर कोई सुरक्षा दीवार या फेंसिंग नहीं की गई है, जिससे स्थानीय मवेशी और ग्रामीण निरंतर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, अत्यधिक गहराई तक किए जा रहे उत्खनन से क्षेत्र का भू-जल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे हसदेव नदी का जल स्तर भी प्रभावित हो रहा है। खदानों के खाली गड्ढों को बिना किसी तकनीकी जांच के सीधे थर्मल पावर प्लांट की राखड़ (फ्लाई एश) से अवैध रूप से पाटा जा रहा है, जिससे भविष्य में जमीन धंसने या दलदल बनने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
मकानों में आई दरारें, दहशत का माहौल
तीव्र विस्फोटों (बोर ब्लास्टिंग) से निकलने वाले कंपन और उड़ते हुए पत्थरों (फ्लाई रॉक्स) के कारण ग्रामीणों के पक्के मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। हाल ही में राज्य स्तरीय (स्टेट लेवल) अधिकारियों की टीम ने भी औचक निरीक्षण कर 8 क्रशर उद्योगों पर कार्रवाई की थी, जिससे स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि शिकायत करने पर खदान मालिकों द्वारा उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं।
डीजीएमएस से स्टॉप वर्क ऑर्डर जारी करने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने महानिदेशक (डीजीएमएस) को भेजे ईमेल में मांग की है कि नियमों की अवहेलना करने वाली इन सभी खनन कंपनियों के खिलाफ खान अधिनियम, 1952 के तहत तत्काल उत्खनन रोकने का आदेश जारी किया जाए। साथ ही, स्वीकृत पट्टा सीमा का डिजिटल सीमांकन कराकर शासकीय एवं गोचर भूमियों पर अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।



