चांपा नगर और जिले में करोड़ो का पटाख़ा, फिर भी अधिकारी कार्यालय में ले रहे एसी का मजा…. मंत्री से मिलने की चर्चा जोरो पर, चकमा देने की तैयारी शुरू… क्या कर लेंगे पत्रकार, समाचार लगाकर?

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वासु सोनी चांपा। दीपावली के पहले नियमों को तोड़कर पटाखा बिक्री के लिए नगर और जिले के अधिकारी कर्मचारी हर प्रयास करते नजर आ रहे है? वही बीते दिन जिले में किसी मंत्री के आगमन पर चर्चा का बाजार गर्म रहा कि पटाखा दुकान कैसे भी करके लगनी चाहिए, वही सुनने को यह भी मिला कि मंत्री जी ने मौखिक आदेश भी दे दिया, जिसके चलते पूरे जिले के अधिकारी कर्मचारी शायद नियमों को दरकिनार करने की तैयारी में पूरी तरह लग चुके है? नगर के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी ही जब इस स्थिति को निर्मित करने लगे तब कोई क्या ही कर सकता है?
20 दिनों बाद भी नहीं टांग पाए नियमों की निर्देशिका…
लगभग 20 दिन पहले से ही पत्रकार द्वारा एसडीएम चांपा से पटाख़ा दुकान और नियमों की जानकारी मांगी गई थी लेकिन अधिकारी द्वारा सिर्फ हवा हवाई बाते कर मामले को टालना मुनासिब समझा गया। वही अब दीपावली मात्र 3 दिन ही शेष बचे है?
क्यों नहीं कर रहे अनुमति के दस्तावेज सार्वजनिक?
करोड़ो के अवैध पटाखे को लेकर नगर और जिला प्रशासन मौन धारण कर रखे है? वही बिना अनुमति सभी कार्य धड़ल्ले से जारी है? जिसके लिए जिले और नगर के अधिकारी सभी नियमों को ताक पर रखकर कार्य कर रहे है? बावजूद संबंधित अधिकारी और कर्मचारी नियमों में पारदर्शिता क्यों नहीं ला पा रहे है? लगता यही है कि जिले और नगर के उच्च अधिकारी कर्मचारी नगर को बारूद के ढेर लगाकर उड़ाने की साजिश रच रहे हैं?
क्यों नहीं कर पा रहे अधिकारी कर्मचारी पटाखों की जांच?
दीपावली के पहले पटाखा दुकानों के आवेदन एसडीएम कार्यालय चांपा तो पहुंचे ही होंगे लेकिन उनके पटाखों की जांच करने अधिकारी इच्छा क्यों नहीं दिखा पा रहे है? क्या अधिकारी कर्मचारियों की मंशा ही नहीं की वे नगर में पहुंचे अवैध पटाखों की जांच कर नगर की सुरक्षा करें? 20 दिन बाद भी एसडीएम कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी कुछ नहीं कर पा रहे है? जिससे सांठ गांठ उच्च स्तर की होने की आशंका नगर में व्याप्त है?
बहरहाल पटाखों की गूंज अधिकारी और कर्मचारी देखना चाह रहे है? जिसके चलते किसी भी प्रकार की पारदर्शिता की उम्मीद नहीं की जा सकती? आम जनता के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है कि आखिर अधिकारी कर्मचारी चाहते क्या है? नगर के अधिकारी कर्मचारी कितने भ्रष्टाचार में डूबे हुए है कि वे भालेराव मैदान में लगने वाले पटाखा दुकानों के लिए कुछ भी करने आमादा है? अब देखना यह है कि कार्रवाई क्या होगी या अवैध पटाखे किस अधिकारी कर्मचारी के चौखट की शान बनेगी?

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