चांपा नगर और जिले में धनतेरस और दीपावली के लिए लिखी गई भ्रष्टाचार की इबारत, धनतेरस के पहले कितने में बिका अधिकारी कर्मचारी का ईमान? पत्रकार वासु सोनी ने लौटाया पटाखा संघ द्वारा प्रदाय किया गया सहयोग राशि? 

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वासु सोनी चांपा। धनतेरस और दीपावली के लिए अधिकारी और कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार की इबारत लिख डाली, वही कार्रवाई क्या हुई, किसने की और कहा कि इसको सार्वजनिक करना किसी अधिकारी कर्मचारी ने नहीं सिखा, सीखा तो सिर्फ अपना ईमान कितने में बेचा जाए?

आपको बताते चले कि चांपा नगर में भ्रष्टाचार की इबारत कैसे लिखी जा रही है? धनतेरस के पहले पटाखा दुकान के लिए आवेदन दिया गया। आवेदन किन किन जगहों से गुजरता है और कैसे गुजरता है लेकिन कहां भ्रष्टाचार किया जाता है ये सोचने वाली बात है?

पटाखा व्यापारी के लिए नए आवेदन ऑनलाइन भरे जाते है वही पुराने ऑनलाइन रिन्युअल किए जाते है। जो पटाखा व्यापारी है वे पटाखों से संबंधित सभी दस्तावेज अनुविभागीय कार्यालय राजस्व के अधिकारी जिसे एसडीएम कहते है उनके पास लेकर जाते है जहाँ सभी आवेदन की जांच की जाती है और उन्हें पटाखा बेचने के लिए अनुमति दी जाती है।

दूसरी प्रक्रिया पटाख़ा कहां बेची जानी है उस स्थान को लेकर नगर पालिका परिषद के अधिकारी कर्मचारी पटाखा व्यापारी के साथ मिलकर स्थान चयन करते है। जिसकी सारी प्रक्रिया नगर पालिका के राजस्व विभाग के कर्मचारी और नगर पालिका के संबंधित अधिकारी की होती है। नगर पालिका परिषद में करीबन 5 विभाग जिसमें राजस्व, नगर पालिका, अग्निशमन, जीएसटी एवं पुलिस से एनओसी लेकर ही अस्थायी पटाख़ा दुकान लगाया जा सकता है लेकिन रिश्वत की भेट चढ़ी पालिका के संबंधित एनओसी सार्वजनिक करना ही मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। जिसके चलते यह माना जा सकता है कि नगर पालिका में रिश्वत के भूखे अधिकारी कर्मचारी ही ऐसा कार्य अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।

करोड़ो के पटाखे भालेराव मैदान सहित नगर में घूम रहे है लेकिन जब इस बारे में चांपा नगर में बनी टीम के सदस्य तहसीलदार आर के मरावी से पूछा गया तो उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी होने से अनभिज्ञता जाहिर कर नगर में पटाखा नहीं होने और पत्रकार से पूछ डाला कि आपको अगर जानकारी हो तो बता दीजिए कार्रवाई अवश्य करेंगे। साथ ही एक एक घर थोड़ी ढूंढते रहेंगे कहते हुए बाते समाप्त की।

कुछ दिनों पहले चल रहे पटाखों से संबंधित समाचार को लेकर कईयों में कौतूहल और समाचार बंद करने सहयोग देने की बात भी सामने आई। जिसमें चांपा नगर के पत्रकार वासु सोनी ने पटाखों से संबंधित किसी भी समाचार रोकने या उसके लिए कोई भी सहयोग पटाखा संघ या किसी ने से नहीं लिया है?

बहरहाल अब देखना यह है कि नगर और जिले के अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते है या रिश्वत रूपी पटाखे से खुद को और अपने परिवार को खुशी प्रदान करेंगे?

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