
वासु सोनी चांपा। नगर में व्यवस्थित आवागमन को लेकर अनेक प्रयास किए जाते है लेकिन उस प्रयास में किस अधिकारी की जेब गर्म होती है, यह बता पाना शायद ही संभव हो सके। क्योंकि अधिकारियों का भ्रष्टाचार और तबादला ही इनकी मजबूती का साधन है। फिलहाल चांपा नगर की बात करे तो मुख्य मार्ग को आधे से अधिक कब्जा कर व्यापार करना अधिकारियों की ही देन है। इसलिए सम्बंधित कोई भी अधिकारी इधर ध्यान देने के बजाय जेब गर्म करना मुनासिब समझते हैं।
कई सालों से चल रहा अवैध कब्जा कर व्यापार करने का सिलसिला
कई त्योहारों या अन्य मौकों पर दिखाएंगे रूप में कुछ कार्रवाई कर दी जाती है ताकि कोई कुछ कह ना सके, वही कागजी कार्रवाई की भी प्रक्रिया हो जाती है, लेकिन उस कब्जे को पूर्ण रूप से हटवाने और व्यवस्थित करने अधिकारियों के पसीने छूट जाते है, वहीं भय यह भी बना होता है कि ऊपर से कार्रवाई ना हो जाए। इसलिए कहावत भी बना है अपना काम बनता, तो ……. के जाए जनता… बाकी जनता और अधिकारी दोनों समझदार हैं।
कैसे करें कार्रवाई, सब अपने हैं भाई…
जनता को जनता के लिए समर्पित वाली कहावत अधिकारियों ने रट रखी है शायद इसी का नतीजा है कि चांपा नगर के मुख्य मार्ग सहित अन्य मार्गों पर अधिकारियों द्वारा भाई भतीजावाद की कार्रवाई देखने को मिल जाती है। इसलिए अधिकारी भी कहने से नहीं चूकते कि क्या करें सभी अपने हैं। इसलिए कार्रवाई भी ढीली पड़ जाती है और संभवतः जेब भी गर्म हो जाती होगी।
असली मजे तो अधिकारियों के…
नगर में मुख्य मार्ग में कब्जा कर व्यापार करने वालों की चांदी ही चांदी है क्योंकि उन्हें कहने वाला कोई है ही नहीं? वहीं ऐसे कई संस्था भी नगर में संचालित है जो कब्जा धारियों को बढ़ावा दे रहे है साथ ही अधिकारियों पर दबाव भी बनाने में सक्षम है, अब अधिकारी भी क्या करे कार्रवाई करें या… बाकी आप समझदार तो है ही…वहीं अधिकारियों के इस प्रक्रिया में मजे ही मजे रहते है लेकिन दिखाने के लिए पास पूरी किताब व्यवस्थित होती है। क्या करें ताली दोनों हाथों बजती है।
फिलहाल नगर में व्यापारियों का अवैध कब्जा शायद ही खत्म हो पाए, क्योंकि बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आती है। क्या जिले के संबंधित अधिकारी इस विषय को ध्यान दे पाएंगे या जेब गर्म कर मामले को ठंडा कर दिया जाएगा।


