वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा का कारनामा लाजवाब है। समस्या तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति या पत्रकार किसी कर्मचारी से कुछ पूछने चला जाए तो कर्मचारी कहते है जानकारी सीएमओ से लो, वहीं जब वर्तमान सीएमओ के पास जाए तो सीएमओ सक्षम अधिकारी का हवाला देकर कलेक्टर और एसडीएम के पास जाने कहते है। नगर पालिका परिषद चांपा में कई वर्षों से जमे कर्मचारी दीमक की तरह नगर को खोखला करने लगे हुए है। रोजाना नगर की जनता नगर पालिका परिषद चांपा पहुंचते जरूर हैं लेकिन कर्मचारियों द्वारा नियमों की झड़ी लगाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
कई कार्य अधूरे, लेकिन पूरे करेगा कौन?
नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत कई योजनाएं संचालित है लेकिन कर्मचारियों को सिर्फ अपने फायदे की योजनाएं ही नजर आती है। नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी अधिकतर समय ठेकेदारों से घिरे रहते है। जिसके चलते नगर की जनता अधिकारी और कर्मचारियों से नहीं मिल पाते। साथ ही नपा चांपा के अधिकारी और कर्मचारी रोजाना किसी ना किसी मीटिंग और जानकारी बनाने में इतने व्यस्त रहते है कि उन्हें नगर की जनता से कोई लेना देना नहीं रहता।
कितने का बकाया, कितना वसूली?
नगर पालिका चांपा में कई योजना के तहत भूमि, भवन, कॉम्प्लेक्स रूपी कमरे का आबंटन किया गया है। लेकिन उससे मिलने वाली राशि का वसूली हो पा रहा या नहीं इसकी जानकारी अधिकारी और कर्मचारियों के पास नहीं है। शायद नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी वसूली अभियान को मजाक बना रखे है। वहीं जिन योजनाओं के नाम पर भूमि, भवन, कॉम्प्लेक्स रूपी कमरे का आबंटन हुआ है उन्हें जिनके नाम पर दिया गया है उनके बजाय कोई और संचालित कर रहा है। जिसका मुख्य कारण अधिकारी कर्मचारियों की मनमानी मानी जा सकती है। क्योंकि उन्हें सिर्फ राजस्व की मिलने वाली राशि से मतलब है लेकिन उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। इसकी जानकारी उन्हें बिल्कुल भी नहीं है।
बहरहाल अधिकारी और कर्मचारियों की मनमानी के चलते नगर विकास के बजाय विनाश की ओर अग्रसर होता जा रहा है। उस पर भी नगर के जिम्मेदार अधिकारी जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के भरोसे कार्य संचालित कर रहे है।

