
वासु सोनी बिलासपुर। सीएमडी महाविद्यालय के पूर्णतः आंतरिक परिसर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने शिक्षा, अनुशासन और नैतिकता—तीनों की जड़ों को हिला कर रख दिया। यह कोई बाहरी तत्वों की हरकत नहीं थी, बल्कि नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) के छात्रों द्वारा किया गया कृत्य था, जो महाविद्यालय प्रशासन और स्वयं एनसीसी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
मिली जानकारी के अनुसार बीते दिन दोपहर लगभग 12:00 बजे, भूगोल विभाग के समीप एनसीसी के कुछ छात्र तथाकथित जश्न के नाम पर इस कदर उन्मादी हो गए कि उन्होंने महाविद्यालय परिसर को ही आतिशबाज़ी का मैदान बना डाला। छात्रों को हाथों में ज्वलनशील पटाखे लेकर उन्हें जलाते और हवा में उछालते हुए देखा गया। यह सब कुछ उसी परिसर में हो रहा था जहाँ छात्र-छात्राएँ पढ़ाई के लिए आते हैं और जहाँ अनुशासन की सबसे अधिक अपेक्षा की जाती है। यह घटना केवल शोर-शराबे या उल्लास की नहीं, बल्कि संभावित बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देने जैसी थी।
कौन लेता जिम्मेदारी?
अगर कोई जलता हुआ पटाखा किसी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी पर गिर जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या तब भी प्रशासन और एनसीसी इकाई इसी तरह मूकदर्शक बनी रहती? स्थानीय छात्रों और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, तेज़ आवाज़ वाले पटाखे, बड़े बम और खतरनाक आतिशबाज़ी बिना किसी सुरक्षा मानकों के फोड़ी गई। जले हुए पटाखों को हवा में उछाला गया, जिससे पूरे परिसर में भय और अव्यवस्था का माहौल बन गया। यह सब उस संस्था के छात्रों द्वारा किया जा रहा था, जिन्हें अनुशासन, संयम और जिम्मेदारी का प्रतीक बताया जाता है।
महाविद्यालय जिसे “विद्या का मंदिर” कहा जाता है, वहाँ इस प्रकार का आचरण न केवल आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि नैतिक मूल्यों का सीधा अपमान भी है। एनसीसी छात्रों द्वारा इस प्रकार का कृत्य यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अनुशासन अब सिर्फ वर्दी और परेड तक सीमित रह गया है?
किसी ने नहीं की रोकने की पहल?
पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि शिक्षकों की उपस्थिति के बावजूद इस पूरे घटनाक्रम को रोकने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। शिक्षकों और प्रशासन की यह निष्क्रियता यह दर्शाती है कि कॉलेज परिसर में नियमों का पालन कराना अब प्राथमिकता नहीं रह गया है। यह लापरवाही किसी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
इस घटनाक्रम ने वहाँ मौजूद अन्य विद्यार्थियों, विशेषकर नए छात्रों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाला। शैक्षणिक वातावरण में इस तरह की अराजक गतिविधियाँ न केवल पढ़ाई में व्यवधान डालती हैं, बल्कि समाज को भी गलत संदेश देती हैं। प्रदूषण नियंत्रण नियमों, महाविद्यालय परिसर के आंतरिक नियमन और सार्वजनिक सुरक्षा—तीनों का इस कृत्य में खुला उल्लंघन किया गया।
आजाद पैनल छात्र शक्ति से चर्चा में यह भी सामने आया कि मौके पर मौजूद कुछ छात्रों ने NCC कैडेट्स को बार-बार समझाने और रोकने का प्रयास किया, लेकिन सभी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करते हुए उन्होंने अपना कृत्य जारी रखा। यह व्यवहार उन छात्रों के लिए और भी चिंताजनक है जिन्हें भविष्य में अनुशासन और कानून व्यवस्था से जुड़ा बताया जाता है।
आजाद पैनल छात्र शक्ति द्वारा इस प्रकार के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की गई और महाविद्यालय प्रशासन से मांग की गई कि दोषी एनसीसी छात्रों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही कॉलेज परिसर में इस तरह की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं एनसीसी इकाई की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी की जांच की जाए।
अब देखना यह होगा कि महाविद्यालय प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर हमेशा की तरह किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?

