
वासु सोनी चांपा। जिले के कलेक्टर और चांपा सीएमओ सहित नपा कर्मचारियों की विनाश गाथा देखनी और समझनी हो तो नगर के हनुमानधारा पहुंचकर आसानी से देखा जा सकता है। कैसे हनुमान धारा पर्यटन स्थल को विकास के नाम पर विनाश की ओर धकेला जा रहा है? बिना किसी इंजीनियर के ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। वहीं नपा चांपा के अधिकारी कर्मचारी बंद एसी कमरे से बाहर निकलने अपनी तौहीन समझ रहे है। ठेकेदार बिना इंजीनियर, बिना नक्शा के मौके पर काम कर रहे है। अधिकारियों की माने तो सूचना के अधिकार के तहत खुद के लिखे शब्दों के बाद भी अधिकारियों की दबंगई आसानी से देखी जा सकती है। अब तो प्रार्थी के साथ जनता को भी अधिकारियों की पढ़ाई पर संदेह होने लगा है? क्या हनुमान धारा पर्यटन स्थल का दस्तावेज अधिकारियों की निजी संपत्ति है? जो सूचना के अधिकार में दस्तावेज देना पसंद नहीं कर पा रहे?
आखिर क्या राज छुपा है दस्तावेज में?
नगर के हनुमान धारा पर्यटन स्थल में विकास कार्य जिस प्रकार कराया जा रहा है। उससे लगता है कि इसकी शुरुआत से ही उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। वह भी रोज किसी ईमानदार अधिकारी के साथ जांच होनी चाहिए? जिले के भ्रष्ट अधिकारी कमीशन की लालच में आकर विकास को विनाश बनाने कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। सूत्रों ने तो यह तक कह डाला कि कहीं 50 प्रतिशत कमीशन का खेल ना हो जाए? इसीलिए अधिकारी दस्तावेज देने आनाकानी कर रहे है।
बहरहाल हनुमान धारा विनाश कार्य शुरू हो चुका है और कमीशन की पहली किस्त का इंतजा भी सभी को बड़ी बेसब्री से है। अब देखना यह है कि हनुमान धारा का विकास हो पाएगा या विनाश की गाथा सबके सामने लिखी जाएगी?

