
वासु सोनी चांपा। नगर पालिक परिषद चांपा में कर्मचारियों की वाणी अगर कोई सुन ले तो भगवान की याद आ जाए। नौकरी तो नियमित है, कौन क्या कर सकता है? जैसे हमारी मर्जी होगी देंगे, नहीं तो कोई कुछ कर भी नहीं सकता।
आपको बता दें कि नगर पालिक के कर्मचारियों की मर्जी के आगे भगवान भी अब नतमस्तक नजर आ रहे है। नपा में किसी फाइल की जानकारी मांगों तो फाइल गायब हो जा रहे है। वही इतने बड़े कार्यालय में फाइल कैसे ढूंढे इसके लिए भी अलग से कर्मचारियों की आवश्यकता लग रही है। मतलब स्पष्ट है कि नपा चांपा के कर्मचारियों को अब खुद के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ने लगी है। वही फाइल के गायब होने के बाद अब क्या जिले के कलेक्टर खुद फाइल खोजकर जनता को देंगे? नपा चांपा के कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल जाने की खुशी इतनी है कि फाइल तक नपा चांपा से गायब होने लगे है? नपा चांपा में कोई दस्तावेज मांग ले तो सीधे सीएमओ से संपर्क करने कहा जाता है? आखिर सांठ गांठ इतनी तगड़ी है कि कमिशन की पोल ना खुल जाए तो दूसरी ओर सीएमओ साहब कलेक्टर से मिलने हिदायत देते है। अब जनता को नौकरी भी नहीं मिल रही और जो कर्मचारी है वो दस्तावेज भी नहीं दे रहे? आखिर जनता अब जाए तो किसके पास? प्रार्थी रोजाना नपा और कलेक्टर कार्यालय ही घूमते रहे? प्रार्थी को भी दस्तावेज देने के लिए घुमाने का वेतन मिलना चाहिए। आखिर प्रार्थी का परिवार अपना जीविकोपार्जन दस्तावेज लेने के चक्कर में कट जा रहा है? वहीं अधिकारी एसी लगे बंद कमरे में भरी गर्मी में ठंड का मजा लेते मिल जाएंगे लेकिन गरीब प्रार्थी को दस्तावेज देने कार्यालय के चक्कर कटवाने अधिकारियों को बहुत आनंद आता है।
बहरहाल दस्तावेज के चक्कर में जब तक किसी प्रार्थी की जान ना चली जाए जांजगीर चांपा जिले के उच्च अधिकारी और कर्मचारियों को चैन कहां से मिल पाएगा? जिले में कितने ऐसे प्रार्थी रोजाना दस्तावेज के चक्कर में कार्यालयों की खाक छान रहे है। अब देखना यह है कि बंद कमरे में एसी का मजा लेने वाले अधिकारी क्या कर पाते हैं या इसके लिए भी उन्हें कमीशन का इंतजार है।

