न्यायालय ने आदेश दिया मानना या ना मानना हमारी मर्जी, अधिकारी है हम… निविदा निरस्त मामले में पीड़ित ठेकेदार को अभी तक नहीं किया गया भुगतान, क्या न्यायपालिका से भी ऊपर समझ रहे अधिकारी अपने आप को? 

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा का निविदा निरस्त मामला अब तुल पकड़ने लगा है। निविदा निरस्त मामले में ठेकेदार को हाई कोर्ट से 1 लाख मुआवजा नगर पालिका चांपा द्वारा दिए जाने की बात सामने आई थी। जिसमें आज पर्यंत ठेकेदार को मुआवजा नहीं दिया गया है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि अधिकारी न्यायपालिका से भी ऊपर अपने आप को समझ रहे है? जिसके कारण वे पीड़ित ठेकेदार को मुआवजे का भुगतान नहीं कर रहे है बल्कि न्याय पालिका को भी ठेंगा दिखाने पीछे नहीं।

आपको बता दें कि निविदा निरस्त मामले में नपा चांपा के ठेकेदार ने हाईकोर्ट का रास्ता अपनाया। जहां उन्हें नगर पालिका द्वारा गलती की सजा के रूप में 1 लाख पीड़ित ठेकेदार को भुगतान करने कहा। लेकिन महीने भर बीत जाने के बाद भी ठेकेदार को मुआवजे की राशि प्राप्त नहीं हुई है। वहीं ठेकेदार ने असंतुष्ट होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मानने और समझने वाली बात यह है कि नगर पालिका के अधिकारी अपने आप को न्याय पालिका से ऊपर समझने लगे तब जनता का क्या होगा? चांपा नगर पालिका की बात करें तो कोई भी उच्च अधिकारी वर्तमान नगर पालिका अधिकारी का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा है। शायद वर्तमान नगर पालिका भगवान की श्रेणी में तो नहीं आ गए है।

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