7 साल से निःशुल्क समर कैंप चला रहीं शिक्षिका ममता ,खेल-खेल में बच्चों को दे रहीं बुनियादी शिक्षा का आधार

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वासु सोनी चांपा। विकासखंड बम्हनीडीह के शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल पिछले 7 सालों से ग्रीष्मावकाश में समर कैंप का आयोजन कर इसे सीखने का सुनहरा अवसर बना रही हैं। वे अपने घर पर निःशुल्क समर कैंप लगाकर गाँव के बच्चों की प्रतिभा को नया आयाम दे रही हैं। समर कैंप से ग्रामीण बच्चों की छिपी प्रतिभा और हुनर को निखार रही है । ममता का मानना है कि हर बच्चे में कोई न कोई हुनर छिपा होता है, बस उसे पहचानकर मंच देना जरूरी है। इसी सोच के साथ शुरू हुआ ये समर कैंप अब गाँव के बच्चों के लिए पहचान बन चुका है। कैंप में शामिल होने वाले छात्र-छात्राएँ ड्राइंग, पोस्टर निर्माण, चित्रकला, नृत्य, नाटक, कहानी-निबंध लेखन, हस्तलिपि लेखन और योग जैसी विधाओं में हाथ आजमा रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए “कबाड़ से जुगाड़” गतिविधि बच्चों में रचनात्मक सोच और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी दोनों विकसित कर रही है। मिट्टी के खिलौने बनाकर बच्चे न सिर्फ कला सीख रहे हैं, बल्कि अपनी कल्पना को भी आकार दे रहे हैं।खेल के जरिए गणित और भाषा की नींव मजबूत हो रही है
पारंपरिक पढ़ाई को बच्चों के लिए बोझ न बनाकर ममता ने उसे खेल का रूप दिया है। उनके नवाचारी गणितीय खेल बच्चों में खासे लोकप्रिय हैं। “संख्याओं का पिटारा” से संख्या पहचान, “तीसरा कौन” से तार्किक सोच, “कौन बड़ी कौन छोटा” से तुलना का ज्ञान, “कैलेंडर से दोस्ती” से समय की समझ और “सेंचुरी बनाओ” से जोड़-घटाव की प्रैक्टिस हो जाती है।वे बताती हैं, “बच्चे खुशनुमा माहौल में खेल-खेल में ही बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान सीख रहे हैं। जब सीखना आनंददायक हो जाता है, तो बच्चे खुद आगे बढ़कर सीखने लगते हैं। समर कैंप सिर्फ पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं है। यहाँ बच्चों को अनुशासन, समय की पाबंदी, टीम वर्क और आत्मविश्वास जैसे जीवनोपयोगी गुण भी सिखाए जा रहे हैं। नाटक और समूह गतिविधियों से बच्चों का झिझक दूर हो रही है और वे मंच पर बेधड़क अपनी बात रख पा रहे हैं। ममता कहती हैं, “समर कैंप का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है। स्वस्थ वातावरण में बच्चों की छिपी प्रतिभा को उभारना और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है। जब बच्चा खुद पर भरोसा करने लगता है, तो पढ़ाई भी आसान हो जाती है।”
पिछले 7 वर्षों से बिना किसी शासकीय सहायता या फीस के चल रहा यह कैंप अब क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गया है। अभिभावक भी बच्चों को यहाँ भेजकर गर्व महसूस करते है । बच्चों के पालक भी अपने अपने बच्चों को समर कैंप के लिए प्रोत्साहित करते है ।

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