
वासु सोनी चांपा। जिले में शराब दुकान के सामने अवैध चखना दुकान संचालित होने से शासकीय दुकान अनुबंध में लेकर चलाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अवैध चखना दुकानों की अवैध कमाई शासकीय चखना दुकानों से कई गुना ज्यादा है? आखिर अवैध चखना दुकान किसके संरक्षण में चल रहा है? वही जिले में आबकारी विभाग के अधिकारी कर्मचारी इस दिशा में ध्यान क्यों नहीं दे रहे? क्या इसकी पीछे कोई बड़ी साजिश है?
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा जिले में लगभग 48 शराब दुकान शासन द्वारा चलाए जा रहे है। वही शराब दुकान के समीप चखना दुकान भी शासन द्वारा अनुबंध पर चलाने दिया गया है लेकिन एक शराब दुकान के समीप अवैध रूप से कई चखना दुकान का संचालन हो रहा है जिसकी जानकारी जिले के आबकारी विभाग में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारियों को है उसके बावजूद कोई कार्रवाई ना हो पाना अवैध दुकान के साथ अधिकारी और कर्मचारियों की अवैध कमाई की ओर इशारा कर रहे है?
स्टाफ की कमी या मसला कुछ और?
जिले के प्रत्येक विभाग में स्टाफ की कमी है तो वहीं अधिकारी और कर्मचारियों को बहुत ज्यादा जिम्मेदारी दे दी गई है। जिसके चलते अधिकारी कर्मचारी कहां कहां जा सकते है? इसकी बात हर समय निकल कर सामने आती है? जिसके चलते हर जगह कार्रवाई करने जाना सम्भव नहीं हो पाता? अब समझने वाली बात यह है कि अगर स्टाफ की कमी हैं तो क्या इसकी जिम्मेदारी जनता उठाएगी? कई सवाल है जो लोगों के जेहन में दौड़ती रहती है। जिसका जवाब देने अधिकारी कर्मचारी कतराते रहते है?

