
वासु सोनी चांपा। गति शक्ति कार्यक्रम के तहत रेलवे स्टेशन चांपा का चयन किया गया है। जिसमें पत्रकारों को बुलाने के लिए ऐसी प्रचार सहायक अंबिकेश साहू को सौंपी गई है जो रेलवे के अधिकारियों से बात करने पर पत्रकारों से बत्तमीजी से बात करते है? साथ ही बत्तमीजी के बाद पत्रकारों को चिढ़ाने में भी उन्हें मज़ा आता है। शायद उन्हें देश के प्रधानमंत्री और रेलमंत्री से विशेष सुविधा मिल रही है। जिसके चलते उन्हें पत्रकारों से बत्तमीजी से बात करने का लाइसेंस मिल गया है साथ ही रेल विभाग प्रचार सहायक अंबिकेश साहू को पत्रकारों से बत्तमीजी करने और उन्हें अधिकारियों से मिलने से रोकने के लिए नौकरी दी गई है?
आपको बता दें कि गति शक्ति कार्यक्रम के तहत पत्रकारों को बुलाने की जवाबदारी ऐसे बत्तमीजी से बात करने वाले प्रचार सहायक को दे दी गई है? साथ ही कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों और अनेक स्थानों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है? शायद रेलवे जोन के अधिकारी दिखाना चाह रहे है कि कैसे इस प्रकार से पत्रकारों को अपमानित करने वाले प्रचार सहायक अंबिकेश साहू को कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है।
पेड़ को काटने किसने दी अनुमति?
गति शक्ति कार्यक्रम के तहत पार्किंग में बहुत पहले से लगे जीवित पेड़ को कार्यक्रम और मनोरंजन के लिए काट दिया गया। जिस जगह पंडाल और स्टेज का निर्माण होना है उसमें आ रही दिक्कतों के लिए आखिर रेलवे के किस अधिकारी ने जीवित पेड़ को काटने आदेश दिया? क्या प्रचार सहायक अंबिकेश साहू ने अपनी मर्जी दिखाने के लिए ऐसा किया होगा? कार्यक्रम के आयोजन के लिए अधिकांश स्थानों पर प्रचार सहायक अंबिकेश साहू को जिम्मेदारी दी है। जिससे यही प्रतीत हो रहा है कि चांपा स्टेशन की उपेक्षा करने के उद्देश्य से यह सब किया जा रहा है?
बहरहाल अब देखना यह है कि प्रचार सहायक अंबिकेश साहू जो पत्रकारों को अपमानित करते है क्या वह चांपा के पत्रकारों को और अधिक अपमानित करेंगे, क्या रेलवे के अधिकारी जानबूझकर ऐसा कर रहे है? क्या चांपा नगर की उपेक्षा करने के उद्देश्य से ऐसा किया जा रहा है?

