
वासु सोनी चांपा। बीते कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि चांपा रेलवे शासकीय पुलिस में नौकरी कर रहे कुछ वरिष्ठ पुलिस आरक्षकों को नौकरी को इच्छा बिल्कुल भी नहीं है। उनके रवैये और काम करने के तरीके से रेलवे का काम आसान होने के बजाय और अधिक बढ़ गया है, बावजूद कई वर्षों जमे आरक्षकों को अब यही लगता है कि शासन उन्हें जल्दी रिटायरमेंट दे दे? वही कई वर्षों का आंकड़ा भी डराने वाला हो सकता है?
क्या शासकीय पुलिस के उच्च अधिकारियों को है जानकारी?
चांपा रेलवे पुलिस के रवैया इस तरह होता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कुछ आरक्षक जो रिटायरमेंट के करीब है उनका रवैया तो प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी कम नहीं है। उन्हें जिस चीज की जवाबदारी दी गई है उसके ऑपोजिट काम करने उन्हें अच्छा लगता है। शासकीय पुलिस के उच्च अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी ऐसा होना यात्रियों के लिए खतरा दूर करना नहीं बल्कि बढ़ा देना है?
गांजा मिला तो क्या हुआ, हमारे पास नहीं आया है?
जीआरपी के आरक्षक दल सिंह से जब इस बारे में जानना चाह तो उनका रवैया कुछ अलग ही रहा, शायद गांजा या गांजा बेचने वाला उनके पास आएगा, तब ही उसका अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा, नहीं तो चांपा जीआरपी को कोई लेना देना नहीं है, कुछ इसी तरह की बाते जो उन्होंने पत्रकार से कही उससे यही प्रतीत होता है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दो बोरे में गांजा चांपा पहुंचने की बात कही जा रही है लेकिन जीआरपी चांपा के कर्मचारियों को इसकी जानकारी तक नहीं, शायद उन्हें पुलिस विभाग के किसी उच्च अधिकारी द्वारा यह कहा गया होगा कि जांच नहीं करना है बल्कि गांजा और गांजा लाने वाला खुद चलकर चांपा जीआरपी के पास आएगा? जिसके कारण चांपा स्टेशन में जीआरपी कर्मचारी की मौज हो रखी है।
जीआरपी की लापरवाही से गई एक की जान, फिर भी चैन से सो रहे जीआरपी के कर्मचारी
आपको बता दे कि कुछ दिन पहले ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री की ट्रेन के नीचे आ जाने से घायल हो गया। करीब आधे घंटे तक कागजी कार्रवाई करने की देरी से यात्री की जान चली गई। चांपा स्टेशन में घटना के बाद यात्री को प्लेटफॉर्म में करीब आधे घंटे तक जानबूझकर पड़ा रहने दिया। जब तक जीआरपी के कर्मचारी ने पूरी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं कर ली, तब तक घायल प्लेटफॉर्म में ही पड़ा रहा, लेकिन जीआरपी चांपा के किसी भी कर्मचारी का दिल नहीं पसीजा, बल्कि उनसे यह कहते सुना गया कि चोट ज्यादा लगने से घायल यात्री की बचने की उम्मीद कर है लेकिन उन्होंने घायल को तत्काल हॉस्पिटल ले जाने के बजाय कागजी कार्रवाई पूरा करना जरूरी समझा।
पत्रकार के कहने पर भी यही जवाब दिया जीआरपी के कर्मचारी ने
आपको बता दे कि इस पूरे घटनाक्रम को नगर के एक पत्रकार ने देखा बल्कि उन्होंने जीआरपी चांपा के कर्मचारियों को निवेदन भी किया कि कागजी कार्रवाई बाद में कर लीजिए पहले घायल को हॉस्पिटल ले जाए तब भी यही जवाब मिला कि कागजी कार्रवाई चल रही है, एंबुलेंस आने का इंतजार है, वही जब तक एंबुलेंस पहुंचती तब तक शायद देर हो चुकी थी, हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही घायल यात्री की मौत हो चुकी थी, जिसकी वजह जीआरपी के कर्मचारी माने जा सकते है?
आज तक नहीं ढूंढ पाए चोरी गए दो बाइक…
आपको बता दे कि कुछ माह पहले चांपा स्टेशन स्थित जीआरपी कार्यालय के बगल से दो बाइक चोरी हो गए है, लेकिन उसे ढूंढने के बजाय जीआरपी के कर्मचारी यही कहते फिरते है कि रेलवे को सीसीटीवी कैमरा लगाना था, हमारी जवाबदारी थोड़ी है, जब नगर के पत्रकार ने भी पूछा तो जीआरपी कर्मचारियों ने वही जवान दिया कि हमारी जवाबदारी थोड़ी है रेलवे को सीसीटीवी कैमरा लगाना चाहिए, अब पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी बताए कि कई महीने बीत जाने के बाद क्या भगवान उस बाइक को ढूंढ कर लाएंगे? वही चांपा स्टेशन स्थित जीआरपी कर्मचारी क्या काम करते है इस पर विशेष निगरानी रखी जाए तो शायद कुछ और भी मामले उजागर हो सकते है?
बहरहाल चांपा स्टेशन स्थित जीआरपी कर्मचारियों की मौज ही मौज है? शायद उनके उच्च अधिकारियों से ऐसी सांठ गांठ है कि रिटायरमेंट के पहले ही उन्हें रिटायरमेंट का सुख दिया जा रहा है? शायद छत्तीसगढ़ पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है या फिर सांठ गांठ की बात सही साबित होगी?


