वासु सोनी चांपा। नगर सहित जिले की ओर नजर डाले तो अक्सर यही देखा जाता है कि विकास की बात तो की जाती है लेकिन विकास की आड़ में विनाश को बढ़ावा दिया जाता है। जब कभी विनाश की स्थिति बाहर आ जाती है तब अधिकारी और कर्मचारी का तबादला कर किसी अन्य को बैठा दिया जाता है, वरन विनाश अपने जगह कायम रहता है।
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा जिला भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। जिले का कोई भी अधिकारी कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहा है बल्कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है। जिले और नगर में ऐसे कई मामले पेंडिंग रखे हुए है जिनका निराकरण आसानी से किया जा सकता है? लेकिन निराकरण करने के बजाय उन मामलों को और अधिक पेचीदा बना दिया जाता है जिसके कारण आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं आम जनता के कार्यों को छोड़ विभागों का काम ही इतना आ जाता है कि जनता के लिए समय ही नहीं बच पा रहा है? जिससे यही प्रतीत हो रहा है कि जब जनता का काम समय पर पूरा करना ही नहीं है तो फिर नौकरी किसी चीज के लिए कि जा रही है? वर्तमान में शासकीय नौकरी कर रहे अधिकारी कर्मचारी को अगर लग रहा को इनसे आम जनता का कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाएगा तो उन्हें अपनी नौकरी छोड़, किसी अन्य को मौका देना चाहिए, जिससे आम जनता की समस्या का समाधान निकल सके।
जांजगीर चांपा कलेक्टर के हाथ से बाहर जिले और नगर के अधिकारी कर्मचारी… क्या जिला कलेक्टर को ही रख रहे भ्रम में?
जांजगीर चांपा जिले के कलेक्टर आए दिन जिले और नगर के अधिकारी और कर्मचारियों की मीटिंग के दौरान सही समय पर सभी कार्यों को पूरा करने का आदेश देते है, उसके बाद भी मीटिंग से बाहर निकलने के बाद आम जनता कई महीनों, सालों तक अधिकारी कर्मचारी के कार्यालय का चक्कर लगाकर अपनी जिंदगी गुजार रहे है। वर्तमान समय में दस्तावेजों में सभी कार्य पूर्ण दिखाकर पेंडिंग कार्यों को और अधिक बढ़ाया जा रहा है। जिला कार्यालय से किसी भी विभाग की तह तक जांच करने पर पता चले कि जिले में कितने मामले पेंडिंग रखे हुए है, लेकिन उनके लिए किसी ईमानदार अधिकारी और कर्मचारियों की आवश्यकता है?
कार्रवाई के लिए शिकायत चाहिए, विभागीय नियम के जांच करना नहीं लिखा…
जिले और नगर के अधिकारी कर्मचारी के सामने ही सभी गलत कार्य संचालित होते है, लेकिन उन पर कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता को जरूरत होती है। बिना शिकायतकर्ता के किसी पर कार्रवाई करना विभाग के किसी नियम या किताबों में नहीं लिखा है। ऐसा जिले और नगर के अधिकारी और कर्मचारी का मानना है। जहां तक देखा जाए तो वर्तमान समय में बिना शिकायत किसी भी विभाग के अधिकारी कर्मचारी कार्यालय से अपने पाव तक बाहर नहीं निकालते। जिससे यही प्रतीत होता है कि उनके नियमों की किताब में विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा जांच करने का नियम ही नहीं लिखा है?
बहरहाल लगातार समाचारों और सोशल मीडिया में ऐसी खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कोई कार्रवाई ना हो पाना जिले और नगर की विडंबना है? जिले और नगर के अधिकारी कर्मचारी उचित कार्रवाई नहीं का पा रहे तो उन्हें अपनी नौकरी छोड़, किसी और को मौका देना चाहिए? ऐसा नगर की जनता का मानना है?

