आम जनता की क्या? हम तो जिला अधिकारी की भी नहीं सुनते? क्या जांजगीर चांपा जिला के विभाग अधिकारियों की सोच ऐसी? 

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वासु सोनी चांपा। जांजगीर चांपा जिला के सभी विभाग प्रमुखों की बात करे तो सभी के मन में सिर्फ एक ही बात गूंजती नजर आती है कि हमे जनता से क्या लेना देना, हम तो जिला अधिकारी की भी नहीं सुनते?

जांजगीर चांपा जिले में सभी विभाग के अधिकारियों की तानाशाही शायद गुलामी की जंजीर जल्द ही जनता के पैरों में कसने की तैयारी कर रहे है। अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों की नहीं सुन रहे है तो जनता की क्या सुन रहे होंगे? कुछ ऐसे ही विभागों की जानकारी हमारे द्वारा ली जा रही है, जो जनता ही नहीं बल्कि जिले के कलेक्टर की भी नहीं सुन रहे होंगे?

जिले और चांपा नगर की बात करे तो आबकारी विभाग के अधिकारी खुद ही अपने विभाग से अंजान है उन्हें जनता के द्वारा दी जा रही शिकायतों से कोई सरोकार नहीं है। कुछ शिकायतें या समाचार या सोशल मीडिया में लगाए गए समाचारों से कोई सरोकार नहीं है? आबकारी विभाग अपने विभागीय नियमों के अनुसार भी काम नहीं कर पा रहे है, साथ ही समय सीमा में दिए जा रहे निर्देशों का भी पालन नहीं कर पा रहे है?

वही खनिज विभाग के अधिकारी की बात करें तो कलेक्टर कार्यालय में कार्यालय होने से उन्हें लगता है कि जिले के जनता और सामान्य लोगो से बात करने में उनकी खातिरदारी कर हो जाएगी। जिसके चलते खनिज विभाग के प्रमुख अधिकारी आम जनता और पत्रकार से बात करने आनाकानी करते नजर आते है। बल्कि उनके कार्यालय में खनिज माफियाओं की भीड़ रोजाना देखी जा सकती है। जिससे यह प्रतीत होता है कि खनिज अधिकारी को कलेक्टर कार्यालय में रहने का कुछ ज्याद ही फायदा मिल रहा हैं। खनिज अधिकारी के संरक्षण में ही कई अवैध कार्यों को अंजाम भी दिया जा रहा होगा, जिसके चलते वे आम जनता और पत्रकार से बात करने समय नहीं निकाल पा रहे है?

दीपावली पर्व को लेकर जिले और नगर में अवैध पटाखों का भंडारण भी शुरू हो चुका है लेकिन संबंधित आधिकारियों को यह भी नहीं पता कि कहां कहां किनके द्वारा अवैध पटाखों का भंडारण रखा हैं या फिर कितने लोगों ने पटाखा बेचने आवेदन। किया है। शायद अधिकारी यह नहीं चाहते कि अवैध पटाखों पर वे कार्रवाई करे? ऐसे अधिकारियों को किसी ऐसे स्थान का दायित्व देना चाहिए जहां वे चैन सुकून से कुर्सी तोड़ते रह सके? अधिकतर अधिकारी अधिक काम वाले स्थान पर पहुंच काम कैसे करना है यह भूल जाते हैं।

वही जीएसटी विभाग की बात करें तो जांजगीर चांपा के कार्यालय में बिना पढ़े लिखे अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त है जिन्हें काम कैसे करना है ये भी नहीं पता? कई अधिकारी तो आवेदन पढ़कर क्या लिखा है यह बताने कहते फिरते है? शायद जिला कलेक्टर या जीएसटी विभाग को ऐसे अधिकारी कर्मचारियों की पढ़ाई संबंधित और संपत्तियों की जांच करनी चाहिए लेकिन वे भी नहीं करना चाहते, बल्कि ऐसे अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति कर जनता का बोझ बढ़ाने का कार्य कर रहे है?

वहीं शिक्षा विभाग की बात करें तो शिक्षा विभाग में क्या क्या चल रहा है ये देखते हुए भी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत और भ्रष्टाचार के एक ही नाव में सवार नजर आते है अगर कही वीडियो वायरल हो जाए तो सिर्फ इधर से उधर बाकी मामला सेट रहता है।

बहरहाल कुछ अन्य विभागों की जानकारी जल्द ही आपके साथ साझा की जाएगी? वही अधिकारियों का रवैया और शिकायत का इंतजार करने वाली बाते साथ ही इधर से उधर वाली नई जानकारियां भी जल्द प्रस्तुत की जाएगी? अब देखना यह है कि जिले में ऐसे मामलों में जिला कलेक्टर कुछ कार्रवाई या सुधार कर जानकारी सार्वजनिक कर पाएंगे या मामला दबा दिया जाएगा?

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