तीर कमान : विश्राम गृह तो है ना…

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वासु सोनी। क्या बात है? जिला जांजगीर चांपा जो है जितना निकाल सकते हो निकाल लो क्योंकि यहां के साहब तो अपने ही मजे में है। अब क्या निकालना है ये भी समझें? जिले में बहती है हसदेव नदी, अब नदी है तो रेत भी निकलेगा। अब निर्माण कार्य के लिए रेत तो जरूरी है ना। लेकिन रेत माफिया दिन रात मेहनत कर रेत बेच रहे है तो साहब भी कहते है कि शिकायत तो होने दो, तब कुछ करेंगे। बाकी विश्राम गृह तो है ही। रेत माफिया तो सक्रिय है ही छोटे मोटे ट्रैक्टर वाले भी अपना हिस्सा निकाल ले रहे। रोड में रोजाना हजारों की संख्या में ट्रैक्टर, ट्रक रेत बेधड़क ले जाया जा रहा लेकिन साहब तो शिकायत के इंतजार में है, जब शिकायत हो तो जायेंगे नही तो विश्राम गृह तो है ही ना। अब ये रेत और विश्राम गृह का संबंध कुछ समझ के बाहर है, वैसे भी पहले, और अब आगे तो जाड़े का मौसम भी आ रहा है। साहब भी कंबल लेने की तैयारी में है। लेकिन कंबल के चक्कर में जब तक शिकायत ना हो साहब कुछ नही करने वाले, अब उपर बैठे बड़े साहब भी तो है उन्हे भी तो कंबल देना है। फिर भी जब तक शिकायत ना हो कुछ नही हो सकता। निकलने दो जितना निकल रहा है कोई कुछ नही कहने वाला। अब किसी ने पूछ लिया साहब छपने छापने वाले पीछे पड़े है तो क्या हुआ उनका भी कुछ नही हो सकता। छपने दो? विश्राम गृह तो है ना।

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