धैर्य रखे ये विद्युत विभाग है, करोड़ों का एरियर्स है, जनता अपना बिल भरे, बाकी लाइट बंद हमेशा होता रहेगा, संसाधन से हमें कोई लेना देना नहीं? अचानक काम आने से लाइट बंद किया जा रहा है?

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धैर्य रखे ये विद्युत विभाग है, करोड़ों का एरियर्स है, जनता अपना बिल भरे, बाकी लाइट बंद हमेशा होता रहेगा, संसाधन से हमें कोई लेना देना नहीं? अचानक काम आने से लाइट बंद किया जा रहा है?

वासु सोनी चांपा। बिजली विभाग की माने तो चांपा शहर को अब गांव में तब्दील कर देना चाहिए? क्योंकि चांपा गांव में रोजाना लगभग आधे से एक घंटे तक अचानक काम आ जाने के कारण लाइट बंद करना पड़ रहा है? वहीं अचानक की बात करें तो ये अचानक क्या है इसके बारे में नगर की जनता को बताने में अधिकारी और कर्मचारियों के हाथ पांव फूल जा रहे हैं।

अब आपको बताते चले कि बिजली विभाग आम जनता से विशेष कर गर्मी के दिनों में क्या निवेदन करते रहते हैं। बिजली विभाग चांपा द्वारा संचालित व्हाट्सएप ग्रुप में जो मैसेज लिखकर डाला गया है पहले उसे पढ़े और समझें-

44 डिग्री का टॉर्चर: क्या इंसान, क्या मशीन… थोड़ा धैर्य, थोड़ा सहयोग!

प्रिय शहरवासियों,

आज हमारा पूरा प्रदेश और शहर सूरज की भीषण तपिश से झुलस रहा है। पारा 44℃ के पार जा चुका है, रातें 30℃ पर उबल रही हैं। इस असहनीय माहौल में हर कोई अपने घरों में एसी और कूलर के सहारे राहत ढूंढ रहा है। बिजली की मांग इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़कर 7,000 मेगावाट के पार जा चुकी है। लेकिन इस संकट के बीच, हमें एक कड़वी मगर सच्ची हकीकत को समझना होगा।

1. *मशीनें भी थकी हैं, उनकी भी एक सीमा है*

जिस तरह हाड़-मांस के बने हम इंसानों की सहने की एक निश्चित क्षमता होती है, ठीक वैसे ही लोहे और तारों से बनी इन मशीनों की भी एक सीमा होती है। 44 डिग्री की झुलसाती धूप में ये ट्रांसफॉर्मर और केबल बिना रुके, लगातार सुलग रहे हैं। जब क्षमता से अधिक लोड पड़ता है, तो ये मशीनें भी ‘हांफने’ लगती हैं और आखिरकार दम तोड़ देती हैं। यह समस्या किसी एक मोहल्ले या शहर की नहीं है, बल्कि इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी में पूरे देश की है।

उत्तर – आखिर जिले और नगर के अधिकारी इस समस्या से निजात पाने गर्मी से पहले इसका उपाय क्यों नहीं पा रहे है? क्या उन्हें रुपए और संसाधन की कमी हो गई है? क्या छत्तीसगढ़ शासन उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं करा पा रही है? जिस प्रकार विभाग इंसान और मशीनों के बीच तुलनात्मक विवरण पेश कर रहा है क्या ये उचित है? अगर ऐसा है तो विभाग को पाषाण युग की तरह अंधेर में जीने की समझाइश देनी चाहिए ना कि मशीनों से तुलना करनी चाहिए? वहीं अधिकारी कर्मचारी अपनी कमजोरी छुपाने और ठेकेदारों का पक्ष लेते नजर आते है?

2. *वो भी किसी के बेटे, किसी के पिता हैं*

सोचिए, जब हम अपने घरों में कुछ मिनट के लिए बिजली चले जाने पर छटपटा उठते हैं, तब बिजली विभाग के कर्मचारी इस जानलेवा धूप में, सड़कों पर, खंभों पर चढ़कर सुलगते हुए ट्रांसफॉर्मरों और फॉल्ट वाले केबलों को ठीक कर रहे होते हैं।

वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं। उनके शरीर में भी वही खून और पानी है जो इस गर्मी में सूख रहा है। वे अपनी जान जोखिम में डालकर, अपनों को घर पर छोड़कर, सिर्फ इसलिए जूझ रहे हैं ताकि आपके घर का पंखा चल सके।

उत्तर – अधिकारी कर्मचारी अपनी कमजोरी छुपाने कमजोर कर्मचारियों का सहारा लेते नजर आते है? विभाग सुविधा मुहैया कराने के बजाय खराब और वैद्यता समाप्त समानों का उपयोग कर खुद अपने कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल रहे है? नए और गुणवत्तायुक्त सामान रहने के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी कमजोरी छुपाने निम्न स्तर के कर्मचारियों की बलि चढ़ाने पीछे नहीं रहते? आखिर नए और सुविधायुक्त सामान उपलब्ध कराने अधिकारी पीछे क्यों रहते हैं? आखिर नए सामान जाते कहां है, ठेकेदार खा जाते हैं या अधिकारी कही गायब करवा देते है? निम्न स्तर के कर्मचारियों के खून पसीने की बात करने वाले अधिकारी जानबूझकर गुणवत्ताहीन कार्य करा आम जनता के सिर पर ओवरलोड का ठीकरा फोड़ देते हैं?

3. *आक्रोश नहीं, आत्मीयता की ज़रूरत है*

बिजली गुल होने पर हमारा गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उस गुस्से को उन बिजली कर्मियों पर निकालना जो खुद इस व्यवस्था को सुधारने में दिन-रात एक किए हुए हैं, कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। वे जादूगर नहीं हैं, वे भी इस व्यवस्था और प्रकृति की मार से जूझ रहे आम इंसान हैं।

उत्तर – व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सिर्फ अपनी बात रखना और जनता की बात ना सुनना एक अभिमानी अधिकारी कर्मचारी होने के प्रमाण देते है? आखिर जनता अपना गुस्सा किस व्यक्ति पर निकाले? विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारी लाइट बंद होने पर अपनी मोबाइल भी बंद कर देते है? वही फ्यूज कॉल न बैठे कर्मचारी फोन ही नहीं उठाते, एक दिन में लगभग 10 से 15 बार लाइट बंद होती है? वहीं ग्रुप में अचानक काम आ जाने का कारण लिखकर लाइट बंद कर देना विद्युत विभाग का ट्रेंड बन गया है?

एक मार्मिक अपील:

जब अगली बार बिजली जाए, तो सब्र का दामन थामें। विभाग के कर्मचारियों से विवाद करने के बजाय, उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति और आदर रखें। इस अप्रत्याशित संकट के समय में पैनिक (घबराहट) न फैलाएं।

उत्तर – बिजली जाने पर किसी को फोन ना करें, विभाग के कर्मचारियों से विवाद करने की बजाय भजन कीर्तन करें, अधिकारी और कर्मचारियों का सम्मान करें ताकि और अधिक बार लाइट बंद की जा सके? घबराए या पैनिक ना होएं इस प्रकार लाइट सदैव बंद होती रहेगी?

0 हम क्या कर सकते हैं? (एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़)

* अनावश्यक लोड कम करें: जिस कमरे में कोई न हो, वहां के एसी, कूलर और लाइट तुरंत बंद कर दें।

* पीक आवर्स में सहयोग दें: दोपहर और रात के समय जब बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है, तब भारी बिजली उपकरणों (जैसे वॉशिंग मशीन, पानी का पंप, या ई-व्हीकल चार्जिंग) का उपयोग टालें।

* स्वीकृत लोड का ध्यान रखें: चोरी छिपे या बिना लोड बढ़वाए भारी उपकरण न चलाएं, क्योंकि आपका एक गलत कदम पूरे मोहल्ले को अंधेरे में धकेल सकता है।

उत्तर – हम क्या कर सकते हैं? (एक ज़िम्मेदार अधिकारी का फर्ज़)

* कोई जानकारी ना मांगे तकलीफ होती है, हमेशा लाइट बंद रखे जिससे लोड ना बढ़े हमें सामान ना मंगवाना पड़े, पुराने संसाधनों पर ही चलते रहें?

* दोपहर और रात के समय लाइट परमानेंट बंद रखे? जिससे अन्य प्लांट या उद्योग को बिजली अधिक सप्लाई की जा सके?

* ओवरलोड और ओवर एरियर्स इतना की नगर के कई संस्थानों से एक रुपए भी नहीं ले पा रहे? हम गलती करें और आम जनता इसका भुगतान करे?

0 वक्त कठिन है, मौसम बेदर्द है, लेकिन हमारा आपसी तालमेल और धैर्य इस जंग को आसान बना सकता है। बिजली कर्मियों के हौसले को तोड़िए मत, इस भीषण गर्मी में उनका संबल बनिए! शांति बनाए रखें, ज़िम्मेदारी निभाएं।

उत्तर – आप धैर्य रखे विद्युत विभाग कुछ नहीं कर पाएगा सिर्फ जनता को धैर्य रखने की समझाइश सदैव मिलती रहेगी? भीषण गर्मी में जनता शांति बनाए रखे अधिकारी है हम?

विद्युत विभाग बनाम आम जनता

🙏🙏🙏🙏🙏

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