भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, लच्छनपूर में चला पौधारोपण अभियान

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वासु सोनी चांपा। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन और मातृ सम्मान से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय हाथकरघा प्रोद्योगिकी संस्थान लच्छनपूर में “एक पेड़ मां के नाम”अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया” जिसमें सहजन,आम, अमरूद ,जामुन नीम आंवला पौधे का रोपण किया गया। उत्साह और उमंग के बीच पौधरोपण कर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिशुपाल सिंह राजपूत जनपद उपाध्यक्ष बलौदा, विशिष्ट अतिथि गेंदराम छोटू कुर्रे सरपंच ग्राम पंचायत लच्छनपूर ,संस्थान के प्रभारी प्राचार्य, पदाधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र छात्राओं ने पर्यावरण का संकल्प लिया ।

मुख्य अतिथि शिशुपाल सिंह राजपूत ने अपने संदेश में कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” केवल पौधारोपण अभियान नहीं बल्कि अपनी मां के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी व्यक्त करने का माध्यम है वही विशिष्ट अतिथि गेंदराम छोटू कुर्रे ने
अपने संदेश में बताया कि आज लगाया गया पौधा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण,और सुरक्षित भविष्य देगा । संस्थान के प्रभारी प्राचार्य सौरभ सिंह ठाकुर ने अपने संदेश में वहां उपस्थित सभी से अपने जीवन के विशेष अवसरों पर भी पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल की अपील की , संस्थान के ग्रंथपाल बिहारी लाल पटेल ने अपने संदेश में बताया कि वृक्षारोपण तभी सफल होगा जब लगाए गए पौधे जीवित रहकर बड़े वृक्ष बनेंगे। वही शिव देवांगन ने बताया कि पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, आक्सीजन उपलब्ध कराने, भूजल संरक्षण तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नरेंद्र सिंह उइके ने कहा कि हर नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी ज़िम्मेदारी निभाए ,तो समूचे राष्ट्र को हरा भरा बनाया जा सकता है। व्याख्याता श्रद्धा दुबे अपने संदेश में बताया मां और प्रकृति दोनों ही जीवन का मूल आधार है। व्याख्याता जयंती देवांगन ने बताया कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण देना है अधिक से अधिक वृक्षारोपण के साथ साथ उनका संरक्षण जरूरी है। वही NCHHD के पुर्णेश्वर रंगारी ने बताया बढ़ते प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच पौधारोपण सबसे प्रभावी उपाय है
उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के प्रभारी प्राचार्य सौरभ सिंह ठाकुर, पुर्णेश्वर रंगारी,ग्रंथपाल बिहारी लाल पटेल, व्याख्याता श्रद्धा दुबे, व्याख्याता जयंती देवांगन, व्याख्याता एकता सोनी,नरेंद्र सिंह उइके, नरोत्तम कुमार देवांगन, अभय देवांगन, फैज अहमद, शिव देवांगन, मेघराज देवांगन, नारायण देवांगन, संतोष कंवर, रूपराम देवांगन, माघीलाल देवांगन, संजय भारद्वाज, कुमारी बाई एवं छात्र छात्राओं की सराहनीय भूमिका रही।

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