वासु सोनी चांपा। जिले में राखड़ कांड रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर देश की सरकार देश को साफ रखने की बातें करती फिर रही है तो दूसरी ओर देश और राज्य में राखड़ कांड लगातार पनपते जा रहा है। अनेक प्रकार के हथकंडे अपनाकर शासकीय सेवक राखड़ माफिया को संरक्षण दे रहे है।
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा जिले के ग्राम पंचायत बिरगहनी में राखड़ पाटे जाने की शिकायत ग्राम के विधायक प्रतिनिधि गोपी यादव ने 20 मई को सुशासन तिहार में की थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार जांजगीर ने संबंधित शिकायत आवास एवं पर्यावरण विभाग का होने के कारण 27 मई 2026 को क्षेत्रीय अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर को भेज दिया। जिसे लेकर विभाग के कर्मचारी मौके की जांच करने पहुंचे थे। जहां उन्होंने पंचनामा बनाकर क्षेत्रीय अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेज दिया।
राखड़ कांड को लेकर प्रार्थी के पास एक आवेदन शिकायत वापस लेने का भी भेजा गया, जिस पर प्रार्थी गोपी यादव ने कोई जवाब नहीं दिया। वही प्रार्थी की अनुपस्थिति में किसी अज्ञात के द्वारा शिकायत वापस आवेदन में फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत का निराकरण भी कर दिया गया।
फर्जी हस्ताक्षर कर किसने दिया शिकायत वापस आवेदन?
प्रार्थी गोपी यादव ने कुछ दिन बाद जब शिकायत की स्थिति देखी तब पता चला कि किसी ने प्रार्थी के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत वापस ले ली है। प्रार्थी गोपी यादव को पता चलने पर उन्होंने इसकी शिकायत जांजगीर चांपा जिले के कलेक्टर और एसपी से की। साथ ही क्षेत्रीय अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर को भी इस फर्जी हस्ताक्षर के बारे में जानकारी दी और दोबारा 1076 मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल में शिकायत कर दी गई।
दोबारा जांच के लिए पहुंचे क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल
फर्जी हस्ताक्षर से शिकायत वापस लेने की जानकारी और 1076 मु्ख्यमंत्री शिकायत पोर्टल में शिकायत करने की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर अपनी टीम के साथ दोबारा जांच करने पहुंची, जहां प्रार्थी सहित गांव के ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और पूरा मामला क्षेत्रीय अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर को बताया भी और दिखाया भी? पर्यावरण विभाग के अधिकारी कर्मचारी के द्वारा बिरगहनी के सभी राखंड युक्त स्थानों की जांच कर वापस चले गए।

प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड चांपा (पीआईएल) को लगा 20 हजार जुर्माना प्रतिदिन…
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार राखड़ भू भराव में 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक की शिकायत पर फ्लाई ऐश यूटिलाइजेशन की गाइडलाइन का उल्लंघन किए जाने पर अनुमति मात्रा से अधिक स्थापित किए जाने पर 20 हजार प्रतिदिन के हिसाब से पर्यावरण क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है।


