तीर कमान : पब्लिक है ये सब जानती है पब्लिक है, फंसा नया पेंच,

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तीर कमान (वासु सोनी) : अरे सुन रहे हो छाप छपाई वाले ने किसी वर्दी वाले के बारे में छाप दिया, अब होना क्या है? कोई तो बौराएगा, लेकिन समझ नही आया कि इतना लंबा खेल आखिर कितने बड़े के संरक्षण में हो रहा है, और छाप वाले छापे क्यो? सवाल तो यही उठ रहा।फिलहाल अब खींचतान शुरू हो चुकी है। लेकिन एक बात समझ से परे है कि चांपा में ऐसा खेल तो वर्षो से चल रहा, रही बात लेने देने की तो उपर नीचे आगे पीछे सब तरफ से तो डंडा लगा ही रहता है। अब थोड़ा ले भी लिया तो छपने छापने वाले पीछे पड़ गए अगर पीछे पड़ना ही है तो बड़े साहब के पीछे पड़े, अरे लेकिन अभी भी समझ नही आ रहा आखिर लोचा कहां है…आखिर छपा क्यों? सवाल तो यही रहेगा, कितने का खेल हो रहा, आखिर कद्दू कटा तो कहां कहां बंटा, और ये छपने छापने और वर्दी का वैसे भी तालमेल नहीं बैठता, चलो देखते है किसकी लाठी और किसकी भैंस…

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