
रायपुर,
रायपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 6 से 7 पार्षद ऐसे हैं, जो नाराज होकर निर्दलीय ही मैदान में उतर गए हैं और कांग्रेस के खिलाफ ही चुनाव लड़ेंगे। बात सिर्फ निर्दलीय चुनाव लड़ने की नहीं है, ये पार्षद अपने ही कांग्रेसी नेताओं पर टिकट बेचने से लेकर अलग-अलग आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं के खिलाफ टिकट बेचने से लेकर चहेतों को टिकट देने जैसे गंभीर आरोप लगाने वाले कई कांग्रेस नेता अब निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। पार्षद चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज कई नेताओं ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मैदान में हैं। असल में कांग्रेस ने जिन लोगों का टिकट काटा है उनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो अपने वार्ड के सिटिंग पार्षद थे या उनकी टिकट पक्की थी। लेकिन रात तीन बजे जो लिस्ट लाई उससे उनका नाम गायब था, जिसके बाद उनका गुस्सा फूट पड़ा।
पहला नाम है हरदीप बंटी होरा का…बंटी शहीद हेमु कलाणी वार्ड से सिटिंग पार्षद हैं वार्ड में पांच साल सक्रिय थे, लेकिन आरोप है की उनका टिकट काट कर जिला कमेटी के नेताओं ने चहेते को टिकट दे दी। कांग्रेस ने वार्ड से जी श्रीनिवास को प्रत्याशी बनाया है।
तीन बार के पार्षद जसबीर सिंह ढिल्लन ने भी हेमु कलाणी या बगल से वार्ड से टिकट मांगी थी लेकिन सुनावाई नहीं हुई। जसबीर ने भी नेताओं पर नमजद आरोप लगाया है और निर्दलीय नामांकन भर दिया है। सिर्फ जसबीर नहीं….तीन बार के पार्षद समीर अख्तर, पूर्व MIC मेंबर विमल गुप्ता, आकाश तिवारी, महापौर चुनाव में एजाज ढेबर के पक्ष में मतदान करने वाले जितेंद्र अग्रवाल, पूर्व पार्षद रितेश त्रिपाठी, अनवर हुसैन का टिकट काट दिया गया। जिसके बाद नेताओं पर टिकट बेचने, पैर छूने वाले लोगों को, या सेंटिंग से टिकट देने का आरोप खुले आम लगाया।
टिकट कटने से नाराज इन पार्षदों ने न सिर्फ निर्दलीय नामांकन भरा है, बल्कि कांग्रेस को चेतावनी भी दी है की उन्होने न सिर्फ संबंधित वार्ड में बल्कि आसापास के 3 से 4 वार्ड में भी इनकी नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हालांकि शहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष गिरीश दुबे आरोपों को खारिज करते हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि सभी को मना लिया जाएगा और संगठऩ में उनकी शक्ति का उपयोग किया जाएगा।
कांग्रेसी नेताओं पर टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। लगभग 15 वार्डों में यही स्थिति है। बागी बने पार्षद चुनाव जीते न जीते ये पक्का है की वे कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। आरोप से कांग्रेस की छवि भी खराब होगी। अब समय ही बता पाएगा की बागियों को कांग्रेस मना पाती है या चुनाव में कांग्रेस को अपनों से ही भिड़ना होगा।


