वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के एकमात्र पर्यटन स्थल हनुमान धारा सौंदर्यीकरण मामले में जिले और नगर के अधिकारी, कर्मचारी सहित ठेकेदारों की मनमानी चरम पर है? उनका मानना है कि सौंदर्यीकरण के लिए किए जा रहे कार्यों में काम की गुणवत्ता सन्देह में है, क्योंकि बिना बोर्ड लगाए, बिजली, पानी, रेत, मिट्टी कई अन्य ऐसे सामान है जिन्हें चोरी कर उपयोग में लिया जा रहा है? वही नगर के विद्युत विभाग, जल संसाधन विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग, वन विभाग सभी नगर पालिका परिषद चांपा और कलेक्टर द्वारा अनुशंसित होने पर जांच करने तक नहीं जा पा रहे है?
कौन रोक सकता है हमें?
वहीं नियमों को ताक में रखकर काम कराया जा रहा है। समय सीमा की बैठक में कलेक्टर की आंख में धूल झोंककर हनुमान धारा पर्यटन स्थल सौंदर्यीकरण की रूपरेखा के बारे में बताया जा रहा है। सभी जानते है कि कलेक्टर रोज निगरानी करने नहीं आ सकते जिसका फायदा बड़ी बेमानी के साथ उठाया जा रहा है? नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और ठेकेदारों का मानना है कि कौन हमें रोक टोक सकता है? शिकायत भी करेंगे तो कलेक्टर हमसे ही पूछेंगे देखने थोड़ी आयेंगे? जिस कारण सभी चोरी का सामान लगाकर निर्माण कार्य किया जा रहा है, बल्कि बिल की तैयारी भी पूरी कर ली गई होगी?
कैसे मिले जल्दी कमीशन?
नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और ठेकेदारों को काम कैसा भी हो, कमीशन जल्दी मिलने की लालसा जाग उठी है? जिसके चलते नियमों को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा है। नगर पालिका परिषद चांपा में कर्मचारियों द्वारा नियमों का हवाला ऐसे दिया जाता है जैसे उन्होंने कभी बिना नियम के काम किया ही नहीं है? बारीकी से जांच करें तो कई इसे घोटाले है जो उजागर हो सकते है?
बहरहाल नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और ठेकेदार मिलकर हनुमान धारा पर्यटन स्थल में पूरा घोटाला करने की मंशा से काम करा रहे है? उचित जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा? लेकिन जिले में ईमानदार अधिकारी कर्मचारी की कमी होने के कारण यह कह पाना संभव नहीं है कि हनुमान धारा में विकास कार्य सही स्तर पर हो पाएगा? जितनी जल्दी निर्माण होगा उससे अधिक जल्दी टूटेगा? इसी मंशा के कारण नगर का विकास नहीं बल्कि विनाश नजर आ रहा है?

