ख़ौफ़नाक तांडव का दर्दनाक अंजाम : नहीं बचा ASI का बेटा, 5 दिन बाद भी कोरबा पुलिस के हाथ ‘खाली’!

0
3

कोरबा। बुधवारी बाईपास से बलगी मार्ग तक 5 दिन पहले देर रात को बदमाशों द्वारा मचाए गए बर्बर तांडव ने आख़िरकार एक बेकसूर की जान ले ली। बदमाशों की बोलेरो की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए एएसआई रात्रे के युवा पुत्र चंद्रमणि रात्रे ने आज शुक्रवार की शाम रायपुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस ख़बर के बाद जहां पूरे जिले में शोक की लहर है, वहीं आम जनता,पीड़ित परिवार के समाज और खाकी परिवार के भीतर ही आक्रोश है।

लेकिन सबसे हैरान और शर्मसार कर देने वाली बात यह है कि इस जघन्य वारदात के 5 दिन बीत जाने के बाद भी कोरबा पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं।

0 सजग कोरबा सतर्क कोरबा’ अभियान पर तमाचा!

एक तरफ कोरबा पुलिस शहर में सुरक्षा का ढोल पीटते हुए “सजग कोरबा सतर्क कोरबा” अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ अपराधियों ने पुलिसिंग की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि जिस दुस्साहसिक घटना में खुद एक पुलिसवाले का युवा बेटा शिकार हो जाए और दम तोड़ दे, उसमें भी अगर पुलिस 5 दिनों तक एक भी आरोपी को न दबोच पाए, तो पुलिस खुद कितनी सजग और सतर्क है? जब खाकी वर्दी वालों के अपने परिवार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा कौन देगा?

0 पत्रकार पर हमला और भारी लूटः कहाँ है कानून का ख़ौफ़?

इस खूनी खेल में न सिर्फ एएसआई के बेटे को कुचला गया, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी सरेआम लहूलुहान किया गया। घटना के बाद आरोपियों के बोलरों वाहन का पीछा कर रहे युवा पत्रकार अरविंद राठौर को 25-30 गुंडों ने घेरकर, कनपटी पर पिस्तौल तानकर न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि मरा हुआ समझकर 1 लाख रुपये नकद, आईफोन, सोने की चेन और अंगूठी भी लूट ली।

एक युवा की मौत और एक पत्रकार पर जानलेवा हमले के 5 दिन बाद भी मुख्य आरोपियों का गिरफ्त से बाहर होना, कोरबा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

0 कबाड़-कोयला नेक्सस को किसका संरक्षण?

शुरुआती ढुलमुल रवैये के बाद हालांकि पुलिस कबाड़, कोयला और डीजल के गोरखधंधे से जुड़े कनेक्शन की बात कह रही है, लेकिन सवाल यह है कि इन अपराधियों को आखिर शह किसकी मिल रही है? अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। खोखली कागजी कार्यवाहियों और अभियानों से इतर, रायपुर में दम तोड़ने वाले चंद्रमणि रात्रे और इस वारदात में घायल हुए पत्रकार अरविंद राठौर को न्याय दिलाने के लिए पुलिस को अब वो ‘सख्त एक्शन’ दिखाना होगा, जो अपराधियों की रूह कंपा दे। वरना, ‘सजग कोरबा सतर्क कोरबा’ का नारा महज़ एक मज़ाक बनकर रह जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here